फसल की खेती (Crop Cultivation)

जैविक खाद बनाम रासायनिक खाद: कौन है बेहतर और क्या है सही रणनीति?

22 जून 2026, नई दिल्ली: जैविक खाद बनाम रासायनिक खाद: कौन है बेहतर और क्या है सही रणनीति? – खेती में जैविक और रासायनिक उर्वरकों को लेकर बहस कई वर्षों से जारी है। एक वर्ग पूरी तरह जैविक खेती का समर्थन करता है, जबकि दूसरा वर्ग उच्च उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों को आवश्यक मानता है। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मुकाबला नहीं बल्कि संतुलन का विषय है।

रासायनिक उर्वरक पौधों को तुरंत पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं। यही कारण है कि इनका प्रभाव जल्दी दिखाई देता है। यूरिया, डीएपी और पोटाश जैसे उर्वरकों ने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया।

दूसरी ओर जैविक खादें जैसे गोबर खाद, कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की संरचना सुधारती हैं। ये मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाती हैं, जल धारण क्षमता में सुधार करती हैं और लाभकारी सूक्ष्मजीवों को सक्रिय बनाती हैं।

केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने से समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जबकि केवल जैविक स्रोतों से उच्च उत्पादन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ “एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन” की अवधारणा को सबसे उपयुक्त मानते हैं।

आज दुनिया भर में यही रणनीति अपनाई जा रही है जिसमें रासायनिक, जैविक और जैव उर्वरकों का समन्वित उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन भी बना रहता है और मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहता है।


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