तरबूज की खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन: फसल को नुकसान से कैसे बचाएं
09 मई 2026, नई दिल्ली: तरबूज की खेती में कीट एवं रोग प्रबंधन: फसल को नुकसान से कैसे बचाएं – तरबूज की फसल में लाल कद्दू बीटल, एफिड्स और फल मक्खी प्रमुख कीट हैं। ये पत्तियों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए जैविक या रासायनिक कीटनाशकों का संतुलित उपयोग किया जाता है।
रोगों में डाउनी मिल्ड्यू और पाउडरी मिल्ड्यू प्रमुख हैं। इनसे बचाव के लिए रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन, फसल चक्र और समय पर फफूंदनाशकों का उपयोग आवश्यक है।
तरबूज गर्मी की नकदी फसल है, जो 25–35 डिग्री तापमान में उगती है। बलुई दोमट मिट्टी और pH 6.0–7.5 उपयुक्त होता है।
बुवाई जनवरी से मार्च के बीच की जाती है। बीज दर 2–3 किग्रा प्रति हेक्टेयर होती है।
उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई (330–350 मिमी), ड्रिप और मल्चिंग तकनीक उत्पादन बढ़ाने में सहायक होती हैं।
फसल 75–90 दिनों में तैयार होती है और 250–350 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है।
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