फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान का जैविक कीट प्रबंधन: ट्राइकोग्रामा कार्ड से तना छेदक और लीफ फोल्डर पर नियंत्रण

09 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान का जैविक कीट प्रबंधन: ट्राइकोग्रामा कार्ड से तना छेदक और लीफ फोल्डर पर नियंत्रण

रासायनिक नियंत्रण के साथ जैविक उपाय भी हैं प्रभावी

धान की खेती में तना छेदक और लीफ फोल्डर जैसे कीटों का प्रबंधन केवल कीटनाशियों पर निर्भर नहीं होना चाहिए। जैविक नियंत्रण तकनीकों को अपनाकर इन कीटों के प्रकोप को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है और लाभकारी जीवों का संरक्षण भी संभव है।

आईसीएआर–केन्द्रीय धान अनुसंधान संस्थान (ICAR-CRRI), कटक ने किसानों को समेकित कीट प्रबंधन (IPM) के तहत ट्राइकोग्रामा कार्ड के उपयोग की सलाह दी है।

ट्राइकोग्रामा कार्ड कैसे करते हैं काम

संस्थान के अनुसार तना छेदक के लिए ट्राइकोग्रामा जापोनिकम तथा लीफ फोल्डर के लिए ट्राइकोग्रामा चिलोनिस का उपयोग किया जाना चाहिए। ये सूक्ष्म परजीवी कीट हानिकारक कीटों के अंडों को नष्ट कर उनकी संख्या बढ़ने से रोकते हैं।

कब करें इनका उपयोग

आईसीएआर-सीआरआरआई के अनुसार खेत में पतंगों की गतिविधि दिखाई देने पर प्रति हेक्टेयर लगभग 60,000 परजीवीकृत अंडों वाले तीन ट्राइकोकार्ड लगाए जा सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार 7–10 दिन के अंतराल पर अधिकतम पांच बार इनका उपयोग किया जा सकता है।

समेकित कीट प्रबंधन को दें प्राथमिकता

विशेषज्ञों के अनुसार फेरोमोन ट्रैप, नियमित निगरानी और जैविक नियंत्रण तकनीकों को अपनाकर रासायनिक कीटनाशियों पर निर्भरता कम की जा सकती है और धान की खेती अधिक टिकाऊ बनाई जा सकती है।

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