कम पानी, बेहतर पैदावार: रेज्ड बेड और ब्रॉड बेड एंड फरो तकनीक की उपयोगिता
(कृषक जगत सन्दर्भ )
04 जून 2026, नई दिल्ली: कम पानी, बेहतर पैदावार: रेज्ड बेड और ब्रॉड बेड एंड फरो तकनीक की उपयोगिता – खेती में जल प्रबंधन, मृदा संरक्षण और फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए खेत तैयार करने की विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इनमें :
*रेज्ड बेड याने “ऊँची क्यारी (Raised Bed) जिसे सरल भाषा में कहा जा सकता है:”खेत में ऊँची क्यारियाँ बनाकर और बीच में नालियाँ छोड़कर की जाने वाली खेती।”
*ब्रॉड बेड एंड फरो याने चौड़ी क्यारी-नाली या मेड़-नाली खेती (BBF) आसन शब्दों में “खेत में चौड़ी मेड़ (पट्टी) बनाकर तथा दोनों ओर नालियाँ छोड़कर की जाने वाली खेती।”

दोनों प्रमुख प्रणालियाँ हैं। दोनों का उद्देश्य जल निकास और पौधों की वृद्धि के लिए बेहतर वातावरण तैयार करना है, लेकिन उनकी संरचना, उपयोगिता और लाभ अलग-अलग हैं।
रेज्ड बेड (Raised Bed) क्या है?
रेज्ड बेड प्रणाली में मिट्टी को उठाकर अपेक्षाकृत संकरे और ऊँचे बेड बनाए जाते हैं तथा उनके बीच सिंचाई या जल निकास हेतु नालियाँ (Furrows) छोड़ी जाती हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
- बेड की चौड़ाई सामान्यतः 60–120 सेमी।
- ऊँचाई 15–30 सेमी या अधिक।
- फसलें बेड के ऊपर बोई जाती हैं।
- नालियों में सिंचाई का पानी प्रवाहित किया जाता है।
ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) क्या है?
बीबीएफ प्रणाली में अपेक्षाकृत चौड़े और कम ऊँचाई वाले बेड बनाए जाते हैं तथा उनके बीच गहरी नालियाँ छोड़ी जाती हैं।
प्रमुख विशेषताएँ
- बेड की चौड़ाई सामान्यतः 120–150 सेमी।
- ऊँचाई 10–20 सेमी।
- नालियाँ जल निकास के लिए अधिक महत्वपूर्ण होती हैं।
- भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में विशेष रूप से उपयोगी।
रेज्ड बेड और ब्रॉड बेड एंड फरो में तुलनात्मक अंतर
| आधार | रेज्ड बेड (Raised Bed) | ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) |
| संरचना | संकरी एवं ऊँची क्यारियाँ | चौड़ी एवं अपेक्षाकृत नीची क्यारियाँ |
| बेड की चौड़ाई | 60–120 सेमी | 120–150 सेमी या अधिक |
| ऊँचाई | अधिक (15–30 सेमी) | कम (10–20 सेमी) |
| जल निकास | अच्छा | अत्यधिक अच्छा |
| सिंचाई विधि | नालियों के माध्यम से | नालियों के माध्यम से |
| उपयोग | सिंचित एवं अर्ध-सिंचित क्षेत्र | वर्षा आधारित एवं जलभराव वाले क्षेत्र |
| मशीन उपयोग | विशेष बेड प्लांटर की आवश्यकता | BBF प्लांटर से आसानी |
| मृदा संरक्षण | अच्छा | बहुत अच्छा |
| जल संरक्षण | अधिक | मध्यम से अधिक |
| उपयुक्त फसलें | गेहूँ, मक्का, सोयाबीन, सब्जियाँ | सोयाबीन, चना, कपास, अरहर |
विश्लेषणात्मक अंतर
जल प्रबंधन की दृष्टि से
रेज्ड बेड
- सिंचाई जल की 20–40% तक बचत संभव।
- पानी केवल नालियों में दिया जाता है।
- जल उपयोग दक्षता बढ़ती है।
बीबीएफ
· अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जल निकास श्रेष्ठ।
· जलभराव से होने वाली जड़ सड़न कम होती है।
· भारी मिट्टी (काली मिट्टी) में विशेष लाभकारी।
विश्लेषण:
सिंचाई जल बचाने के लिए रेज्ड बेड बेहतर है, जबकि वर्षा जल निकास के लिए BBF अधिक प्रभावी है।
मृदा स्वास्थ्य की दृष्टि से
रेज्ड बेड
- मिट्टी में वायु संचार बेहतर।
- जड़ विकास अधिक गहरा और स्वस्थ।
बीबीएफ
- मिट्टी का कटाव कम।
- सतही जल प्रवाह नियंत्रित रहता है।
विश्लेषण:
रेज्ड बेड जड़ वृद्धि को बढ़ावा देता है, जबकि BBF मृदा संरक्षण में अधिक प्रभावी है।
3. फसल उत्पादकता की दृष्टि से
रेज्ड बेड
- अंकुरण अच्छा।
- पौधों की समान वृद्धि।
- कई अध्ययनों में 10–20% तक अधिक उपज।
बीबीएफ
- जलभराव कम होने से पौधों का जीवित प्रतिशत बढ़ता है।
- वर्षा आधारित खेती में उपज स्थिर रहती है।
विश्लेषण:
सिंचित क्षेत्रों में रेज्ड बेड अधिक उपज दे सकता है, जबकि असमान वर्षा वाले क्षेत्रों में BBF अधिक स्थिर उत्पादन प्रदान करता है।
4. लागत एवं यंत्रीकरण
रेज्ड बेड
- प्रारंभिक लागत कुछ अधिक।
- विशेष उपकरणों की आवश्यकता हो सकती है।
बीबीएफ
- बड़े क्षेत्रों में आसानी से लागू।
- यंत्रीकरण के लिए उपयुक्त।
विश्लेषण:
व्यावसायिक और बड़े खेतों में BBF अधिक किफायती साबित हो सकता है।
रेज्ड बेड प्रणाली के प्रमुख लाभ
1. जल की बचत-20–40% तक सिंचाई जल की बचत।
2. उर्वरकों की बेहतर उपयोग दक्षता-पोषक तत्वों का नुकसान कम।
3. बेहतर जड़ विकास-मिट्टी में पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध।
4. खरपतवार नियंत्रण-नालियों तक सीमित खरपतवार वृद्धि।
5. यंत्रीकृत खेती में सुविधा-निराई, बुवाई और कटाई आसान।
6. अधिक उपज-विशेषकर गेहूँ, मक्का एवं सब्जियों में।
बीबीएफ प्रणाली के प्रमुख लाभ
1. उत्कृष्ट जल निकास-वर्षा के अतिरिक्त पानी की शीघ्र निकासी।
2. जलभराव से सुरक्षा-सोयाबीन, चना और कपास जैसी फसलों के लिए लाभदायक।
3. मृदा संरक्षण-मिट्टी कटाव कम होता है।
4. वर्षा आधारित खेती के लिए उपयुक्त-वर्षा जल का बेहतर प्रबंधन।
5. पौधों का बेहतर जीवित रहना-जड़ों को पर्याप्त वायु मिलती है।
6. जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूल-अत्यधिक वर्षा की स्थिति में भी फसल को नुकसान कम।
किस स्थिति में कौन-सी प्रणाली अपनाएँ?
| परिस्थिति | उपयुक्त प्रणाली |
| सिंचित क्षेत्र | रेज्ड बेड |
| जल की कमी वाले क्षेत्र | रेज्ड बेड |
| भारी काली मिट्टी | बीबीएफ |
| अधिक वर्षा वाले क्षेत्र | बीबीएफ |
| सब्जी उत्पादन | रेज्ड बेड |
| सोयाबीन-चना प्रणाली | बीबीएफ |
| जलभराव की समस्या | बीबीएफ |
| सटीक सिंचाई (Precision Farming) | रेज्ड बेड |
निष्कर्ष
रेज्ड बेड और बीबीएफ दोनों ही आधुनिक संरक्षण कृषि (Conservation Agriculture) की महत्वपूर्ण तकनीकें हैं। रेज्ड बेड प्रणाली जल बचत, बेहतर जड़ विकास और उच्च उत्पादकता के लिए अधिक उपयुक्त है, जबकि ब्रॉड बेड एंड फरो प्रणाली वर्षा आधारित खेती, भारी मिट्टी और जलभराव की समस्या वाले क्षेत्रों में अधिक प्रभावी सिद्ध होती है। खेत की मिट्टी, वर्षा, सिंचाई उपलब्धता और फसल के आधार पर उचित प्रणाली का चयन करने से उत्पादन लागत घटाई जा सकती है तथा उपज एवं संसाधन उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सकती है।
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