फसल की खेती (Crop Cultivation)

जानिए केरल और तमिलनाडु में लोकप्रिय केले की किस्म नेंद्रन (एएबी) का उपयोग  

30 दिसम्बर 2023,भोपाल: जानिए केरल और तमिलनाडु में लोकप्रिय केले की किस्म नेंद्रन (एएबी) का उपयोग  – केले की किस्म नेंद्रन (एएबी) को फ्रेंच प्लांटैन, एथक्कई, मायंडोली और राजेली के नाम से भी जाना जाता है। यह केरल और तमिलनाडु की एक लोकप्रिय केला किस्म है। फसल की अवधि 10-11 माह होती है। केरल में, इसका उपयोग ताजे फल के रूप में और चिप्स के रूप में किया जाता है। इस किस्म से बने चिप्स बहुत लोकप्रिय हैं। 

नेंद्रन (एएबी) के गुच्छे का औसत वजन 10-12 किलोग्राम होता हैं जिसमें 4-5 हाथ होते है। वे 40-50 फलों/गुच्छों से भरे हुए होते हैं। इसके फल बड़े- मोटे और लंबे डंठल वाले होते हैं। फल की लंबाई 20-25 सेमी और चौड़ाई 15-16 सेमी होती है। पकने पर फल गहरे पीले रंग के हो जाते हैं। इसका गूदा स्टार्चयुक्त, गुलाबी या नारंगी-गुदे वाला होता है, जो सीए-रोटेनॉइड सामग्री (1200 ग्राम/100 ग्राम) से भरपूर होता है और पकने के बाद भी स्टार्चयुक्त रहता है।

गूदे की रंग पाउडर जैसा मैला होता है और इसमें लंबी शेल्फ लाइफ होती है। इसके फल कैरोटीनॉयड से भरपूर होते हैं और अपने औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं। इसका फल चिप्स और पाउडर उद्योगों के लिए अत्यधिक उपयुक्त हैं।

इस किस्म के कच्चे फल से केले का पाउडर तैयार किया जाता हैं। इसकी कई उपयोगिताएँ हैं जैसे शिशु आहार, स्वास्थ्य पेय, बिस्कुट, ब्रेड और चपाती में। वही पूरी तरह से पके फल को भाप में उबाला जाता है और गूदे को अच्छी तरह से कुचलने के बाद बच्चों को खिलाया जाता है। 

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