फसल की खेती (Crop Cultivation)

कृषि में नीम का महत्व

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14 अक्टूबर 2022, भोपाल: कृषि में नीम का महत्व

कृषि में नीम का महत्व
  • खेती में रसायनों के अंधाधुंध उपयोग का विकल्प नीम के उत्पाद।
  • नीम की निंबौली में अजाडिरिक्टिन कम्पाउण्ड-एक कीटनाशक रस पाया जाता है।
  • खेती में नीमैक्स जैविक खाद 125-150 किग्रा/हेक्टेयर धान फसलों हेतु प्रयोग।
  • मानव में त्वचा रोग, कैंसर, पीलिया, बुखार में लाभदायक एवं पर्यावरण के लिये उपयोगी।
  • एन्टीफर्टिलिटी अध्ययन जो चूहे एवं बंदरों में हुआ, से पता चला है कि नीम के बीज के निचोड़ से बने इंजेक्शन लगने से इनके जन्म पर नियंत्रण पाया गया है।
  • खेती के अलावा नीम से मनुष्य में कैंसर ठीक हो जाता है, यदि शुरू में ही दे दिया जाए खाज-खुजली, चर्म रोग, पीलिया, रक्ताल्पता, बुखार, हृदय रोग को रोकने में मददकारी भी है और पर्यावरण को शुद्ध करता है।
  • मानव शरीर में नीम से सीरम कोलेस्ट्रॉल में कमी आती है, जबकि सीरम प्रोटीन, रक्त यूरिया एवं यूरिक अम्ल के स्तरों पर कोई प्रभाव नहीं होता है।
  • नीम वातावरण को तो शुद्ध रखता है ही, बल्कि मानव रक्त को भी साफ करता है 5 से 10 नीम की पत्तियां रोज चबाने से खून की अनेक अशुद्धियों से छुटकारा मिलता है।
  • खेती में नीमेक्स नामक जैविक नामक एवं खाद एवं कीट निवारक पदार्थ भी प्रयोग होता है, जिससे मृदा की उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी, मनुष्य के लिये स्वादिष्ट, विष रहित, स्वास्थ्यवर्धक जैविक भोजन उत्पादित करता है, इसकी मात्रा धान्य, दलहन, तिलहनी फसलों में 125-150 किग्रा/हेक्टेयर बुवाई से पूर्व डालने से लाभ मिलता है, फलों वृक्षों में 500-1000 ग्राम प्रति वृक्ष प्रति छ: मास डालने से भी लाभ होता है।
  • नीम की संस्कृत शब्द निम्बा से उत्पत्ति है, जिसका अर्थ बीमारी से छुटकारा पाना है।
  • नीम के सभी 5 भाग – पत्ती, फूल, फल, जड़ व तने की छाल औषधि महत्व की होती है।
  • पत्ती में निम्बिनी, निम्बेन्डीअल एवं क्वैर्सेन्टिन, छाल में निम्बिन, निम्बडीन व निम्बनीन, जिसे निम्बीसिडिन कहते हैं, फूल में स्टेरोल्स, थायोमायल एल्कोहॉल, बैन्जायल एल्कोहॉल, बेन्जायल एसीटेट एवं आवश्यक वर्सीय अम्ल बीज फल में गैडमिन, गेडुमिन, एजाडिरोन, निम्बिओल, निबौली में- अजाडिरिक्टिन यौगिक होते हैं, गेडऊमिन में एनटीमेलेरियल क्रिया होती है।
  • निमीबिडोल बीज से निकला तेल पाया जाता है। यह एक दर्द निवारक औषधि के रूप में काम आता है।
  • नीम की ताजी पत्ती का रसायनिक संगठन नमी 59.4 प्रतिशत, प्रोटीन 7.1 प्रतिशत, वसा 1 प्रतिशत, रेशा 6.2 प्रतिशत, खनिज लवण 3-4 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट 22.9 प्रतिशत, कैल्शियम 510 मिली ग्राम/100 ग्राम, फास्फोरस-80 मिली ग्राम/100 ग्राम, लौह तत्व 17 मिली ग्राम/100, थायमीन 0.04 मिली /100 ग्राम, कैरोटान 1988 माइक्रो ग्राम/100 ग्राम, ऊर्जा मान 1290 किलो कैलोरी/किलोग्राम।
  • नीम के बीज में 1.0 प्रतिशत तेल पाया जाता है।
  • नीम की पत्तियों में पाए जाने वाले अम्ल (मिली ग्राम/100 ग्राम भाग में) है- ग्लूटेमिक अम्ल-73.7, एस्पेरटिक अम्ल-15.5, टाइरोसिन-31.5, एलानिन-6.4, प्रोलिन-4.0 एवं ग्लूटामिन 1.0 आदि।
  • खेती में उर्वरक एवं रसायनिक पदार्थों कीटनाशकों दवाओं, फफूंदीनाशकों एवं खरपतवारनाशक दवाओं के अंधाधुंध प्रयोग ने हमें सोचने के लिये यह विवश कर दिया है कि निश्चय ही ये रसायन पदार्थ स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है, उदाहरण के तौर पर आज सब्जियों में बैंगन, टमाटर, मिर्च, आलू आदि। फलों केला, आम, कपास, गन्ना आदि में इन रसायनों का बहुतायत में प्रयोग किया जा रहा है, आखिर सोचों कि किस राह पर जाएगी यह खेती ? यदि कृषि रसायनों का प्रयोग ऐसे ही बढ़ता रहा तो अगली पीढ़ी तक भूमि के घटते उपजाऊपन की समस्या तो होगी।

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