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फसल की खेती (Crop Cultivation)

कश्मीर के सेब बागानों में लीफ माइनर की बढ़ती समस्या का कारण जलवायु परिवर्तन बताया गया

31 अक्टूबर 2025, नई दिल्ली: कश्मीर के सेब बागानों में लीफ माइनर की बढ़ती समस्या का कारण जलवायु परिवर्तन बताया गया – कश्मीर के सेब बागानों में हाल के वर्षों में लीफ माइनर कीट का प्रकोप बढ़ा है, जिसे कृषि विभाग ने बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों से जोड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कीट करीब पाँच साल पहले पहली बार देखा गया था, लेकिन पिछले तीन वर्षों में इसके मामलों में तेजी आई है।

विधायक शबीर अहमद कुल्ले के एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में कृषि उत्पादन विभाग (बागवानी सेक्टर) ने बताया कि हाल के वर्षों में तापमान बढ़ने और वर्षा के पैटर्न में बदलाव के कारण लीफ माइनर और एफिड जैसे कीटों की संख्या और गंभीरता दोनों में वृद्धि हुई है। विभाग का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कीट बाहर से आया या पहले से स्थानीय रूप में मौजूद था और जलवायु परिवर्तन के चलते फिर सक्रिय हो गया। शोध संस्थान इस पर अध्ययन कर रहे हैं।

विभाग ने कहा कि कीट पर नियंत्रण के लिए निगरानी और फील्ड सर्वे को मजबूत किया गया है तथा SKUAST-कश्मीर के सहयोग से समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं। लीफ माइनर के तेज़ी से फैलने की क्षमता को देखते हुए, विभाग ने सामुदायिक स्तर पर जैव-नियंत्रण एजेंट, सीमित मात्रा में कीटनाशक उपयोग और किसानों की भागीदारी को आवश्यक बताया है।

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हवाई छिड़काव की मांगों पर विभाग ने स्पष्ट किया कि अनुसंधान संस्थान बड़े पैमाने पर छिड़काव की सिफारिश नहीं करते, क्योंकि इससे पर्यावरणीय जोखिम बढ़ते हैं, खेत छोटे हैं और उपयुक्त अल्ट्रा-लो वॉल्यूम फॉर्मुलेशन उपलब्ध नहीं हैं। विभाग ने कहा कि कीट प्रबंधन संबंधी सभी कदम SKUAST-कश्मीर और केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान (CITH) की सलाह पर जारी रहेंगे।

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पिछले दो वर्षों में विभाग ने बताया कि करीब 15.5 लाख फल पौधे—मुख्यतः गाला और रेड डिलिशियस जैसी उच्च घनत्व वाली सेब किस्में—बेल्जियम, इटली, नीदरलैंड और तुर्की से निजी एजेंसियों के माध्यम से आयात किए गए हैं। इन पौधों को कृषि मंत्रालय की एक्सिम समिति से स्वीकृति और क्वारंटीन मंजूरी के बाद आयात किया गया।

विभाग ने यह भी माना कि प्रदेश में सेब उत्पादन अभी भी आयातित पौध सामग्री पर निर्भर है। देश में नर्सरी उत्पादन को आत्मनिर्भर बनने में लगभग दस वर्ष लग सकते हैं। समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (HADP) और जम्मू-कश्मीर प्रतिस्पर्धात्मकता सुधार परियोजना (JKCIP) के तहत विभिन्न जिलों में मदर ऑर्चर्ड, रूटस्टॉक बैंक और प्लांट प्रोपेगेशन यूनिट स्थापित किए जा रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए शोपियां जिला, जो कश्मीर का प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र है, को 30 हेक्टेयर क्षेत्र में उच्च घनत्व पौधारोपण का लक्ष्य दिया गया है। अगले दस वर्षों में कुल 5,500 हेक्टेयर क्षेत्र में ऐसी खेती को बढ़ावा देने की योजना है। विभाग ने बताया कि रासायनिक उर्वरक या कीटनाशकों पर कोई सब्सिडी नहीं दी जाती, लेकिन जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रति इकाई 50% वित्तीय सहायता (लगभग 600 अमेरिकी डॉलर तक) वर्मीकम्पोस्ट उत्पादन के लिए दी जा रही है।

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