किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह, खेत में 4 इंच तक नमी होने के बाद ही करें बुवाई; जल्दबाजी पड़ सकती है भारी
07 जुलाई 2026, भोपल: किसानों के लिए कृषि विभाग की सलाह, खेत में 4 इंच तक नमी होने के बाद ही करें बुवाई; जल्दबाजी पड़ सकती है भारी – मौसम की अनिश्चितता और कई जिलों में सामान्य से कम बारिश को देखते हुए मध्यप्रदेश कृषि विभाग ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में जल्दबाजी नहीं करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि जब तक खेत में पर्याप्त नमी न हो, तब तक बुवाई करना जोखिम भरा हो सकता है। वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुसार खेती करने और जरूरी सावधानियां अपनाने की अपील की है।
कृषक कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक उमाशंकर भार्गव ने मैदानी अमले को किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखने और उन्हें समय-समय पर कृषि सलाह देने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार, खेत में करीब 4 इंच (एक बालिश्त) तक नमी होने और बतर आने के बाद ही खरीफ फसलों की बुवाई करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। फिलहाल मानसून पूरी तरह सक्रिय नहीं है, इसलिए किसानों को कुछ दिन इंतजार करना चाहिए।
सिंचाई की सुविधा है तो करें हरित खाद की बुवाई
कृषि विभाग ने कहा है कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे इस दौरान खेतों में ढैंचा या सनई जैसी फसलों की बुवाई हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) के लिए कर सकते हैं। जिन क्षेत्रों में पहले ही बारिश हो चुकी है, वहां भी हरित खाद वाली फसलें बोई जा सकती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और अगली फसल को बेहतर पोषण मिलेगा।
खेत की तैयारी और बीज उपचार पर दें विशेष ध्यान
विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद, वर्मी कम्पोस्ट, सिंगल सुपर फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश, जिंक सल्फेट और जिप्सम जैसी आधार खाद का उपयोग करें। साथ ही सोयाबीन के बीजों का अंकुरण परीक्षण जरूर करें और केवल 70 प्रतिशत या उससे अधिक अंकुरण क्षमता वाले बीजों का ही उपयोग करें।
कृषि विभाग ने रोग एवं कीट प्रतिरोधी और कम पानी की आवश्यकता वाली किस्मों का चयन करने की सलाह भी दी है। बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक और जैव उर्वरकों से उपचारित करना जरूरी बताया गया है।
सोयाबीन और धान की खेती के लिए विशेष सलाह
सोयाबीन की बुवाई में जलभराव और सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए रिज एंड फरो सीड ड्रिल, ब्रॉड बेड एंड फरो (BBF) सीड ड्रिल या हस्तचालित सीड डिब्लर जैसी तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं धान की खेती में श्री पद्धति या सीधी बुवाई अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
वर्षा जल का करें संरक्षण, फसल बीमा भी कराएं
कृषि विभाग ने किसानों से वर्षा जल का अधिक से अधिक संरक्षण करने की अपील की है। इसके लिए खेत तालाब, पोखर, सोख्ता गड्ढे, कुओं और नलकूपों में पानी रोकने तथा भूजल रिचार्ज की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है। विभाग का कहना है कि खरीफ फसलों में अंतरवर्ती खेती (इंटरक्रॉपिंग) अपनाने से मौसम संबंधी जोखिम कम किया जा सकता है।
इसके अलावा किसानों को समय पर फसल बीमा कराने और मौसम विभाग की नियमित जानकारी के आधार पर ही कृषि कार्य करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग का कहना है कि थोड़ी सावधानी और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर किसान मौसम की अनिश्चितता के बावजूद बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

