सर्दियों में आए फूलों की भरपूर बहार, ध्यान रखें उनका आहार
फूलों की भरपूर उपज पाने के लिए संतुलित खाद व उर्वरक का उपयोग अति आवश्यक है। इसके उपयोग से खेत की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है तथा पौधों का विकास स्वस्थ एवं संतुलित होता है। संतुलित खाद का अर्थ है
नवीनतम उद्यानिकी (Horticulture) सम्बंधित जानकारी और कृषि पद्धतियों में नवाचार, बुआई का समय, बीज उपचार, खरपतवार नियन्तारन, रोग नियन्तारन, कीटो और संक्रमण से सुरक्षा, बीमरियो का नियन्तारन। उद्यानिकी (Horticulture) फसल सम्बंधित समस्या और उनका समाधान। टमाटर, प्याज़, आम, केला, पपीता, तरबूज़, मटर, गोभी, ककड़ी, फूल गोभी, करेला, स्टीविया, जुकिनी (तुरई), कद्दू, करेला, मिर्च, शिमला मिर्च, अरबी, रतालू, कटहल की फसल की खेती की जानकारी और नई किस्मे। ग्लेडियोलस, गुलाब, गेंदे की खेती। उद्यानिकी फसल में कीट नियंतरण एवं रोग नियंतरण। उद्यानिकी फसलों मैं बीज उपचार कैसे करे, बीज उपचार का सही तरीका। मशरुम की खेती, जिमीकंद की खेती, प्याज़ की उपज कैसे बढ़ाए, औषदि फसलों की खेती, जुकिनी की खेती, ड्रैगन फ्रूट की खेती, बैंगन की खेती, भिंडी की खेती, टमाटर की खेती, गर्मी में मूंग की खेती, आम की खेती, नीबू की खेती, अमरुद की खेती, स्ट्रॉबेरी की खेती, पपीते की खेती, मटर की खेती, शक्ति वर्धक हाइब्रिड सीड्स, लहसुन की खेती। शीत लहर में फसलों एवं सब्जियों को कीट-रोगों, पाले से बचाएँ
फूलों की भरपूर उपज पाने के लिए संतुलित खाद व उर्वरक का उपयोग अति आवश्यक है। इसके उपयोग से खेत की उपजाऊ शक्ति बनी रहती है तथा पौधों का विकास स्वस्थ एवं संतुलित होता है। संतुलित खाद का अर्थ है
यूरिया में लगभग 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होता है, जो कि वृक्ष की पत्तियों में हरित लवकों (ग्रीन प्लास्टिड्स) का निर्माण करते हैं, जो कि प्रकाश-संश्लेषण (फोटोसिन्थेसिस) द्वारा खाद्य फसलों का निर्माण करने में सहायता करते हैं। इसके कारण फसल की
धार। कलेक्टर श्री श्रीमन् शुक्ला ने गत दिनों कलेक्टर कार्यालय में रबी विपणन वर्ष 2017-18 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017-18 के लिए 14 जनवरी 2017 से
खेती में धन, श्रम और समय की बचत के लिए कृषि यंत्रीकरण अति आवश्यक है। देश के 50 लाख ट्रैक्टर 12 करोड़ किसानों को पर्याप्त सुविधा नहीं दे पाते इसलिए छोटे किसानों तक यंत्रीकरण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए
औषधीय उपयोग: मण्डूकपर्णी का प्रयोग प्रमुख रूप से तंत्रिका तंत्र, मनोरोग, पागलपन, मिर्गी जैसे भयानक रोगों के उपचार हेतु प्रयोग किया जाता है। महर्षि चरक के अनुसार मण्डूकपर्णी मानसिक रोगों के उपचार की अचूक वनस्पति है। मृदा एवं जलवायु: यह
सदियों से भारतीय कृषि में छोटे रूप में मिश्रित खेती का समावेश हुआ करता था। खेत की तैयारी से लेकर बुआई, कटाई, गहाई सभी कार्यों के लिये प्राय: हर कृषक के पास एक बैल जोड़ी, अनाज को स्थानान्तरण के लिये
संरक्षित खेती का मतलब होता है खेती करने का एक आधुनिक और वैज्ञानिक तरीका जिसके अन्र्तगत पौधों को विपरीत प्रकृतिक परिस्थितियों या प्रतिकूल वातावरण जैसे तेज गर्मी, तेज सर्दी, तेज हवा, तेज प्रकाश की तीव्रता, अतिवृष्टि, अनावृष्टि इत्यादि से पौधों
डेम्पिग ऑफ : पीथियम फाइटाफ्थोरा एवं राइजोक्टोनिया नामक फफूंदों के मिले-जुले संक्रमण से यह रोग होग होता है। सर्वाधिक संक्रमण पीथियम नामक फफूंद से होता है कृषक इस रोग को स्थानीय स्तर पर कमर तोड़ रोग के नाम से पुकारता
किसानों की आय 5 वर्षों में दोगुनी करने के लक्ष्य को हासिल करने नरसिंहपुर जिले के ग्राम-करताज, सिंहपुर, लोकीपार, जल्लापुर एवं जोबा के लगभग 30 युवा किसानों ने समूह बनाकर लगभग 150 एकड़ में मुनगा (ड्रमस्टिक) की खेती ड्रिप विधि
जलवायु एवं भूमि – धनिया की खेती शीतोष्ण एवं उपोष्ण दोनों प्रकार की जलवायु में की जाती है। बसंत ऋतु में पाला पडऩे से पौधों को क्षति होने की संभावना रहती है। इसका अंकुरण होने के लिए 20 डिग्री से.ग्रे.