समस्या – समाधान
समस्या – मैं धान के खेत में नीलहरित काई का उपयोग करना चाहता हूं कृपया तरीका बतलायें। – पवन कुमार,मासौद समाधान-धान के खेत में डाली गई रसायनिक उर्वरकों की मात्रा का केवल 30-40 प्रतिशत ही पौधों को प्राप्त हो पाता
समस्या – समाधान (Farming Solution) में विभिन्न फसलों के लिए किसानों की समस्याओं के जवाब, कृषि संबंधी समाधान, पौधों की सुरक्षा, बीज का चयन, बुआई और खेती कैसे करें शामिल हैं। समस्या – समाधान (Farming Solution) में बीज उपचार, खरपतवार नियंतरण, रोगोन और संक्रमण से सुरक्षा आदि भी शामिल हैं। इसमें कीट और रोग संलग्न, सिंचाई समस्या, मौसम संबंधी समस्याएं, मिट्टी जनित रोग संबंधी समस्याएं, बीज चयन, उर्वरक खुराक सुधार से संबंधित समस्याएं भी शामिल हैं। इसमें गेहूं, सोयाबीन, चना, धान, बासमती जैसी फसलें और आम, सेब, पपीता, अमरूद, बिंदी, भिंडी, टमाटर, प्याज, फूलगोभी, मटर, ड्रैगन फ्रूट, तोरी आदि फल और सब्जियां (बागवानी फसलें) शामिल हैं। इसमें कीटों और बीमारियों के लिए कृषि रसायनों की सही खुराक और उर्वरक अनुप्रयोग के लिए सही खुराक भी शामिल है।
समस्या – मैं धान के खेत में नीलहरित काई का उपयोग करना चाहता हूं कृपया तरीका बतलायें। – पवन कुमार,मासौद समाधान-धान के खेत में डाली गई रसायनिक उर्वरकों की मात्रा का केवल 30-40 प्रतिशत ही पौधों को प्राप्त हो पाता
समस्या – मैं ग्वारपाठा लगाना चाहता हूं कृपया तकनीकी बतायें। – तुलसीराम राय, गंजबासोदा समाधान – ग्वारपाठा को घृतलहरी भी कहा जाता है। इस समय इसको लगाने का समय भी चल रहा है। आप भी लगायें परंतु निम्न तकनीकी अपनायें।
जब तेजी से वर्षा होती है तो वर्षा के पानी की सम्पूर्ण मात्रा को भूमि सोख नहीं सकती। थोड़ी ही देर में सतह की मिट्टी के संतृप्त हो जाने पर पानी एकत्र होने लगता है और नीचे सतह की ओर
– नन्दकुमार नायक, मंदसौर समाधान- आमतौर पर कृषक नीम के पत्ते, गिरी का उपयोग उसका रस निकालकर, इसके अलावा नीम तेल का उपयोग भी गोमूत्र में मिलाकर किया जाता है। आपने नीम पत्तों को गरम पानी में उबालकर रातभर रखने
– जगदीश पांडे, सुल्तानपुर समाधान- धान उत्पादक कृषकों को धान की नर्सरी से ही चौकन्ना होना जरूरी है। बीमार पौधों की रोप मुख्य खेत में लगाने से उत्पादन प्रभावित होता है। नर्सरी डालने का समय 15 मई से 20 जून
– जमुना प्रसाद, खरगौन समाधान- मूंगफली का टिक्का रोग आमतौर पर खरीफ के मौसम में आता है। जायद में उसके लिये आद्र्रता तथा तापमान उपयुक्त नहीं होती है। आप निम्न लक्षणों से उसे पहचानें। द्य बुआई के 30 दिनों के
– राम खिलावन, छिंदवाड़ा समाधान- पपीते की पत्तियों पर विषाणु रोग एवं पत्ती मुडऩ रोग आमतौर पर आते हैं और यदि समय से उपाय नहीं हो पाया तो सभी वृक्ष रोगग्रसित हो जाते हैं। यह दोनों बीमारी विषाणु अर्थात् वाईरस
सखनलाल मेहरा, गोविन्दगढ़ समाधान- आम का यह सबसे अधिक खतरनाक रोग है इसके द्वारा 20-25 प्रतिशत तक क्षति देखी गई है। इस रोग के लक्षण दो तरह से दिखाई देते हैं पुष्पक्रम विकृति तथा गुच्छा शीर्ष विकृति। फूल आने के
– भंवरलाल, शाजापुर समाधान- हाल में हुई वर्षा के कारण रबी फसलों को नुकसान हुआ है। इतने बड़े नुकसान की भरपाई एक बार में असंभव है फिर यदि भूमि में उपलब्ध नमी का लाभ उठाकर यदि अधिक से अधिक क्षेत्र
-रामअवतार सिंह, राजनांदगांव समाधान – आप कुंदरू लगाना चाहते हैं आपके क्षेत्र में कुंदरू बहुत लगाया जाता है तथा उत्पाद का निर्यात भी होता है। आप कुंदरू लगायें निम्न तकनीकी अपनायें। 1. कुंदरू लता वाली फसल है इसकी कलम लगाई