Editorial (संपादकीय)

Editorial related to agriculture in India, agriculture policies, farmer feedback & its relevance in Indian Scenario.

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औषधीय पौधे अधिक आय का साधन

प्राचीनकाल से भारत में औषधियों का भंडार रहा है। ऋग्वेद में (5000) वर्ष पहले 67 औषधीय पौधों का यजुर्वेद में 81 तथा अर्थववेद में (4500-2500 वर्ष पहले) औषधीय पौधों की 290 जाति का उल्लेख किया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में

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खरीफ की तैयारी का समय

मई माह के महत्वपूर्ण कृषि कार्य पंचों, भीषण गर्मी का समय चल रहा हेै । अधिकांश जल स्त्रोत सूख गये है। सबसे ज्यादा मुसीबत पशुओं की है । जल संकट के ऐसे कठिन समय में, हमें पशुओं का विशेष ध्यान

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आधुनिक खेती में है  संभावनाओं का द्वार

भारत शुरू से ही कृषि प्रधान देश रहा है। यहां की आबादी के 70 फीसद लोग कृषि से सीधे जुड़े हैं। कृषि पर इतनी बड़ी आबादी की निर्भरता कृषि विज्ञान में रोजगार की असीम संभावनाओं का द्वार खोलती है। कुछ

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भण्डार गृह बनाने के लिये किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान

इंदौर। राज्य शासन के निर्देशानुसार कृषकों को प्याज की खेती के मुनाफे के लिये प्याज भण्डार गृह बनाने की योजना प्रस्तावित है, ताकि प्याज की खेती के उचित दाम मिल सकें। चूंकि प्याज भण्डार गृह निर्मित नहीं होने के कारण

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जायद में लगाएं खीरा

मिट्टी – लगभग सभी प्रकार की भूमियों में की जा सकती है। परन्तु इसकी सफलतापूर्वक खेती के लिये बलुई दोमट तथा मटासी मृदा उत्तम मानी जाती है। उन्नत किस्में – पूसा संयोग, पाइनसेट, खीरा-90, टेस्टी, मालव-243, गरिमा सुपर, ग्रीन लॉंग,

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गेहूं बीज उत्पादन तकनीक

बीज एक वैज्ञानिक विधि द्वारा तैयार किया जाता है। सही ढंग से उपचारित, पैक, चिंहित एवं उचित ढेर प्रदर्शित करता है। वह अपनी जाति व गुणों के मानकों के अनुरूप होता है। अच्छे बीज रोग, कीट, खरपतवार व अन्य फसल

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पौधों में पोषक तत्वों की कमी के लक्षण और उनका निदान

जब पौधे अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व मृदा से ग्रहण नहीं कर पाते तो वे कमी के लक्षण दिखाते हैं। इनकी कमी को पौधों में उत्पन्न पहचाना जा सकता है। इन तत्वों की कमी को उचित

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कलेक्टर द्वारा जैविक खेती का अवलोकन

कटनी। कलेक्टर श्री प्रकाश जांगरे द्वारा ग्राम बण्डा में कृषि विस्तार सुधार कार्यक्रम (आत्मा) अंतर्गत गठित जय लक्ष्मी महिला समूह की सदस्य श्रीमती उर्मिला हल्दकार द्वारा उत्पादित की जा रही जैविक फसलों टमाटर, लौकी, सेम, आलू, मटर आदि का अवलोकन

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ठंड में क्या खाएं और क्यों खाएं

सर्दी सेहत बनाने का मौसम है। खूब सारे फल आते हैं, पाचन-शक्ति अच्छी होती है और खूब भूख भी लगती है। कहा जाता है कि इस मौसम में पत्थर भी पचाए जा सकते हैं। जो लोग जिम जाकर बॉडी बनाना

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पाले से फसलों का बचाव

डॉ. शंकर लाल गोलाडा शीत लहर एवं पाले से सर्दी के मौसम में सभी फसलों को थोड़ा या ज्यादा नुकसान होता है। टमाटर, आलू, मिर्च, बैंगन आदि सब्जियों, पपीता एवं केले के पौधों एवं मटर, चना, अलसी, जीरा, धनिया, सौंफ

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