श्री विधि से सरसों की खेती
श्री विधि से सरसों की खेती क्या है? यह सरसों की खेती करने का तरीका है जिसमें श्री विधि के सिद्धांतों का पालन करके अधिक उपज प्राप्त की जाती है जैसे – कम बीज दर सिर्फ 50 ग्राम से 250
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
श्री विधि से सरसों की खेती क्या है? यह सरसों की खेती करने का तरीका है जिसमें श्री विधि के सिद्धांतों का पालन करके अधिक उपज प्राप्त की जाती है जैसे – कम बीज दर सिर्फ 50 ग्राम से 250
गेहूं की फसल पर जड़ माहू का नियंत्रण भारत जैसे विशाल देश में खाद्य समस्या को सुलझाने में गेहूं महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। गेहूं के प्रमुख कीटों से नुकसान के कारण इसकी उत्पादकता कम हो जाती है। कभी-कभी फसल
मसूर की खेती भारतवर्ष में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं झारखण्ड में मुख्य रूप से होती है। उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 611 किग्रा है। म.प्र. में मसूर का क्षेत्रफल 6.2 लाख हेक्टेयर है परन्तु उत्पादकता 371 किग्रा है। म.प्र. में अशोक
पोषक तत्व, प्रोटीन, आयरन, जिंक से भरपूर बीज उपचार: मालवी गेहूं की उन्नत किस्म एचआई-8737 पूसा अनमोल इस किस्म में बीज जनित बीमारियों के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, अत: कवकनाशी से बीज का उपचार न
प्रकृति की विचित्र मेहरबानी से इस वर्ष नवम्बर के शुरूआती सप्ताह तक पानी बरसता रहा इससे रबी फसलों की बुआई के लिये, भूमि की तैयारी के लिये अच्छा अवसर मिल गया, जहां तक अच्छे उत्पादन का प्रश्न है। यदि भूमि
वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न रायसेन। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायसेन में वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में श्री एन.पी. सुमन, उपसंचालक कृषि, डॉ. पी.के. अग्रवाल, उपसंचालक पशुुपालन, डॉ. अरविन्द सक्सेना, सह प्राध्यापक, कृषि
पौधों को बगीचों में लगाने के पश्चात् उनकी शीघ्र एवं उचित वृद्धि के लिए अच्छी प्रकार से देख-रेख करना आवश्यक है। जिसके लिये निम्रलिखित काम सुचारू रूप से करना चाहिये:- सिंचाई:- नये स्थापित पौधों में पानी की अधिकता व कमी
रबी फसलों में गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों, गन्ना इत्यादि फसलों की बुआई लक्ष्य के आस-पास पहुंच चुकी है और अब समय आ गया है कि फसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाये। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिये
गुलाब पर भी अनेक प्रकार के रोग लगते हैं, बड़े शौक और तमन्नाओं के साथ लगाए गुलाब के पौधे में मनमुताबिक फूल न लगने और छोटे व कम फूल लगने या पौधों में बीमारी लगने पर खीज और निराशा होने
नई दिल्ली। अपोलो टायर्स ने इंडियन चेम्बर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (आईसीएफए) के साथ मिलकर फार्म पावर इण्डस्टी में उत्कृष्टता को पहचानने के लिए अपोलो फार्म पावर अवाड्र्स की स्थापना की। इंडियन चेम्बर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर द्वारा आयोजित एग्रो