मौसम मैं करेला, ककड़ी, लौकी, कद्दू की खेती कैसे करें

आया मौसम करेला, ककड़ी लगाने का जलवायु एवं भूमि: इनकी बेलों की अच्छी वृद्धि 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर होती है। इनके लिए उपजाऊ दोमट भूमि जहां पानी का निकास अच्छा हो वह मृदा उत्तम रहती है। इनकी

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रजनीगंधा की उन्नत खेती करने के आसान तरीके

रजनीगंधा की खेती  रजनीगंधा एक व्यावसायिक एवं बहुवर्षीय कंद वाला फूल है। इसका प्रसारण कंद से किया जाता है। फूल चिकने, सुगंधित एवं रंग सफेद होता है।  फूल को अच्छी किस्म के इत्र बनाने में प्रयोग किया जाता है। भारत

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गेहूं एक ही खेत में बार-बार लगाना लाभदायक नहीं

भूमि की तैयारी : खेत तैयार करने के लिये विभिन्न कृषि क्रियाओं की मात्रा मुख्य रूप से भूमि को किस्म फसल चक्र एवं उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर रहती है। उन स्थानों पर जहां गेहूं की खेती वर्षा के आधार पर

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अमरूद के बाग़ मैं कीट रोग एवं इनकी रोकथाम

फल मक्खी- यह मक्खी बरसात के फलों को हानि पहुंचाती है। यह फल के अंदर अण्डे देती है जिनमें मेगट पैदा होकर गूदे को फल के अंदर खाते है। नियंत्रण- ग्रसित फलों को नष्ट करें तथा 0.02 प्रतिशत डायजिनान या

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मिर्च को कीट-रोगों से बचायें

भारत में फसलों में मिर्च की खेती का एक महत्वपूर्ण स्थान है। मिर्च का प्रयोग हरी मिर्च की तरह एवं मसाले के रूप में किया जाता है, इसे सब्जियों और चटनियों में डाला जाता है। मिर्च में अनेक औषधीय गुण

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मोठ की खेती

भूमि एवं तैयारी मोठ की खेती हल्की भूमियों में अच्छी होती है, मोठ के लिए बलुई दोमट एवं बलुई भूमि उत्तम होती है, भूमि में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, मोठ की खेती के लिए दो बार हेरों

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सिंघाड़ा की खेती

सिंघाड़ा तालाबों में पैदा होने वाली एक नगदी फसल है। मध्यप्रदेश में सिंघाड़े की खेती  लगभग 6000 हेक्टेयर में किया जाता है। सिंघाड़े के कच्चे व ताजे फलों का ही उपयोग मुख्यत: किया जाता है इसके अलावा पके फलों को

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पन्ना – क्यारी विधि से प्याज की खेती

रसायनिक उर्वरकों का उपयोग करने से भूमि की उर्वरा क्षमता कम होती जा रही थी। धीरे-धीरे ज्यादा मात्रा में रसायनिक उर्वरकों की आवश्यकता बढऩे से बाजार पर लगातार निर्भर रहना पड़ता था। इससे कौशल किशोर मिश्रा को भारी आर्थिक क्षति

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बैंगन की इल्ली का इलाज

पन्ना। कृषि विज्ञान केन्द्र पन्ना के डॉ. बी. एस. किरार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख एवं डॉ. आर. के. जायसवाल वैज्ञानिक द्वारा ग्राम सिंहपुर, प्रतापपुर, खोरा, नयागांव में विगत दिवस भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान सब्जी उत्पादक रामप्रसाद साहू, कौशल

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खीरा की खेती

जलवायु – खीरा गर्म जलवायु का पौधा है। यह अधिक ठंड एवं पाला सहन नहीं कर सकता है। जहां वातावरण में आद्र्रता कम हो और सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में हो तो खेती अच्छी प्रकार से की जा सकती

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