रेज्ड बेड से सोयाबीन का विपुल उत्पादन संभव : प्रो. तोमर

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जबलपुर। म.प्र. राज्य पूरे देश में सोयाबीन उत्पादन में अग्रणी होने के कारण सोया राज्य के नाम से जाना जाता है, परन्तु विगत कुछ वर्षो से मौसम की प्रतिकूलता के कारण पैदावार में असर होने के कारण सोयाबीन कास्त के क्षेत्रफल में निरन्तर कमी आई है, जिससे कि किसान सोयाबीन छोड़कर दूसरी फसलों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के जायका अनुसंधान परियोजना के तहत सोयाबीन बोने की रेज्ड बेड तकनीक विकसित की है। जिसमें बदलते मौसम के परिवेश में भी सोयाबीन का विपुल उत्पादन संभव है।
कृषि विश्वविद्यालय के जायका अनुसंधान के प्रक्षेत्र में अपने भ्रमण के दौरान कुलपति प्रो. विजय सिंह तोमर ने बताया कि सोयाबीन की बुवाई रेज्डबेड तकनीक से करने से जहॉं अधिक वर्षा होने की दशा में फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है वहीं कम वर्षा होने की दशा में पौधों की जड़ों में नमी संरक्षित होने के कारण फसल पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता एवं फसलों से अपेक्षित पैदावार एवं आय प्राप्त होती है। परियोजना भ्रमण के दौरान अधिष्ठाता कृषि संकाय डॉं. पी.के. मिश्रा, प्राध्यापक डॉं. एस.बी. नाहतकर, डॉं. एम.एल. केवट एवं परियोजना वैज्ञानिक डॉं. अमित झा के साथ ही कृषि अभियंता व्ही.व्ही. मौर्य, डॉं. जे.के. शर्मा एवं जितेन्द्र दुबे, संचालक अनुसंधान सेवाएं, डॉ. एस.के. राव भी उपस्थित रहे।

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