गेहूं एवं जौ पर ग्वालियर में कार्यशाला संपन्न

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06 सितम्बर 2022, इंदौर: गेहूं एवं जौ पर ग्वालियर में कार्यशाला संपन्न – अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल द्वारा गत दिनों ग्वालियर में कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में पधारे देश भर के विभिन्न अनुसंधान संस्थाओं के वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत प्रजाति और तकनीक का सारगर्भित सलाह दी और अपने द्वारा किए जा रहे विभिन्न कार्यों और जो नई प्रजाति रिलीज हुई है या होने वाली है उनके आलेख प्रस्तुत किए ।

कार्यशाला में सहभागिता करने के बाद लौटे अजड़ावदा (उज्जैन )के प्रगतिशील कृषक डॉ योगेंद्र कौशिक, ने कृषक जगत को बताया कि कार्यशाला में प्रगतिशील किसानों से उनकी आवश्यकता के अनुसार सुधार की संभावना पर विचार आमंत्रित किए थे , जिसमें डॉ कौशिक ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि देश दुनिया में बढ़ते तापक्रम से गेहूं का उत्पादन गिर सकता है क्योंकि आईपीसीसी (इंटर गवर्नमेंटल पैनल आफ क्लाइमेट चेंज) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2080 से 2100 तक भारत और दक्षिण एशिया में तापमान बढ़ने और सिंचाई योग्य पानी की कमी होने के कारण गेहूं का उत्पादन 10 से 15% तक कम हो जाएगा और पूरी फसल अवधि के दौरान तापमान में प्रति 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ने के कारण भारत में गेहूं का उत्पादन 40-50 लाख मे. टन घट जाएगा । यहां तक कि कार्बन बढ़ाने से भी कोई लाभ नहीं होगा । देश दुनिया की जनसंख्या में भी वृद्धि को देखते हुए उस पर आज से ही चिंतन करना चाहिए और ऐसी प्रजातियों का विकास करना चाहिए ,जो बढ़ते तापक्रम रोधी हो, कम पानी में बढ़ते तापक्रम में भी अच्छा उत्पादन देने में सक्षम हो।

कार्यशाला में आमंत्रित प्रगतिशील किसानों ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत के बदौलत ही आज गेहूं के उत्पादन में देश आत्मनिर्भर बना , बल्कि दुनिया के दूसरे नंबर का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक देश बन गया । जहाँ 70 के दशक में देश में हर पांचवी रोटी आयातित गेहूं की बनती थी और आज नई -नई उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली प्रजाति हम किसानों तक पहुंचा करके एक दशक में गेहूं के उत्पादन में लगभग 17% की वृद्धि हुई ।जिसका श्रेय कृषि वैज्ञानिकों को जाता है । बता दें कि केंद्र सरकार की किसानों के स्तर में सुधार वाली सोच , कृषि बजट में वृद्धि और उनकी नीतियों के कारण विगत 8 वर्षों में देश के अनुसंधान संस्थानों के ज्येष्ठ -श्रेष्ठ वैज्ञानिकों ने गेहूं और जौ की 146 नई प्रजातियां को विकसित किया है। इस कार्यशाला के सूत्रधार करनाल संस्थान के निदेशक डॉ जीपी सिंह ने जानकारी दी कि अगले वर्ष लगभग 22 और नई किस्में किसानों के बीच आ रही है, जो अब तक के श्रेष्ठ उत्पादन से भी 5% अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियां होगी । उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत प्रजाति और तकनीक की सारगर्भित सलाह दी।

इस कार्यशाला में देश के ख्याति प्राप्त कृषि विशेषज्ञ श्री डा टीआर शर्मा डीडीजी, डॉ डीके यादव , एडीजी, श्री डॉ रवि प्रताप सिंह, पूर्व कुलपति डॉ विजय सिंह तोमर, डॉ एस के शर्मा, डीआरएस ग्वालियर, डॉ मिश्रा ,पूर्व अध्यक्ष (आईएआरआई इंदौर) , डॉ बी मिश्रा पूर्व कुलपति, डॉ सेवाराम, डॉ एससी भारद्वाज, डॉ साई प्रसाद , हैदराबाद, डॉ रानडे (कार्यवाहक कुलपति) आदि कई कृषिविद उपस्थित थे। कार्यशाला में डॉ ज्ञानेंद्र सिंह, डॉ अनुज कुमार, डॉक्टर पूनम जसरोटिया, डॉ अमित शर्मा, डॉ मिश्रा करनाल, तथा ग्वालियर के प्रसार कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा। इसके पूर्व आमंत्रित प्रगतिशील किसानों ने मंचासीन कृषि विदों का साफा बांधकर और बाबा महाकाल का चित्र भेंट कर स्वागत किया गया ।

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