छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रहीं सफलता की नई कहानी, औषधीय खेती से बन रहीं ‘लखपति दीदी’
22 जुलाई 2026, रायपुर: छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रहीं सफलता की नई कहानी, औषधीय खेती से बन रहीं ‘लखपति दीदी’- छत्तीसगढ़ में औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया माध्यम बन रही है। छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड की पहल से रायपुर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को घर की अनुपयोगी बाड़ी में सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे नि:शुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, धमतरी जिले में बंजर और अनुपयोगी जमीन पर औषधीय खेती कर महिला स्व-सहायता समूह लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। यह मॉडल अब महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और कृषि नवाचार का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है।
अनुपयोगी जमीन को बनाया कमाई का जरिया
धमतरी जिला लंबे समय से धान आधारित खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन सीमित आय और अनुपयोगी भूमि की चुनौती को देखते हुए वर्ष 2025 में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) और राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से औषधीय एवं सुगंधित फसलों के कृषिकरण की शुरुआत की। इस अभियान में महिला स्व-सहायता समूहों को केंद्र में रखकर अनुपयोगी और कम उत्पादक भूमि पर औषधीय फसलों की खेती शुरू कराई गई।
150 एकड़ में शुरू हुई खेती, महिलाओं की आय बढ़ी
पहले चरण में करीब 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़ा गया। इसमें लगभग 80 एकड़ में खस, 20 एकड़ में ब्राह्मी, 10 एकड़ में बच तथा 40 एकड़ में लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली की खेती शुरू की गई। महिलाओं को गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और शत-प्रतिशत बाय-बैक की सुविधा दी गई। इसके परिणामस्वरूप पहले अनुपयोगी मानी जाने वाली जमीन से अब प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय होने लगी है।
‘लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई रफ्तार
महिला समूहों का कहना है कि औषधीय खेती ने उनकी आय बढ़ाने के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। अब वे बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। किसान भी पारंपरिक धान की खेती के साथ लेमनग्रास और खस जैसी फसलों को अपना रहे हैं। राज्य सरकार महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत इस मॉडल का विस्तार कर रही है। अब इस पहल को 500 एकड़ तक बढ़ाने और 500 से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन पर भी होगा काम
इस मॉडल की खासियत केवल खेती तक सीमित नहीं है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है। साथ ही भविष्य में आवश्यक तेल निष्कर्षण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन पर भी काम किया जाएगा, जिससे किसानों और महिला समूहों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
धमतरी के इस मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। औषधीय एवं सुगंधित पौधों के कृषिकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए जिले को राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया। आज कई राज्यों के किसान, अधिकारी और संस्थाएं इस मॉडल का अध्ययन करने धमतरी पहुंच रहे हैं। यह पहल ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में एक सफल मॉडल बनकर उभरी है।
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