महिला किसानों को मिलेगी औपचारिक पहचान, रायसेन-विदिशा से शुरू होगा गरीबी मुक्त गांव अभियान: शिवराज सिंह चौहान
18 अक्टूबर 2026, रायसेन: महिला किसानों को मिलेगी औपचारिक पहचान, रायसेन-विदिशा से शुरू होगा गरीबी मुक्त गांव अभियान: शिवराज सिंह चौहान – मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सांची में शुक्रवार को आयोजित महिला किसान सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने महिला किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में महिला किसानों को खेती में उनके वास्तविक योगदान के आधार पर औपचारिक पहचान दिलाने के प्रयास किए जाएंगे।
चौहान ने सम्मेलन में कहा कि किसान की पहचान केवल जमीन के मालिकाना हक से नहीं, बल्कि खेती में उसके वास्तविक योगदान से भी होनी चाहिए। उनके अनुसार खेत में काम करने वाली, फसल उगाने वाली और पशुपालन करने वाली महिलाओं को भी महिला किसान का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने फल-सब्जी उत्पादन, औषधीय पौधों की खेती, मछली पालन और मुर्गी पालन में महिलाओं की भूमिका का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।
रायसेन-विदिशा से गरीबी मुक्त गांव अभियान
कार्यक्रम की सबसे बड़ी घोषणा रायसेन और विदिशा जिलों से एक पायलट अभियान शुरू करने की रही। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य हर गांव के हर परिवार को कम से कम एक आजीविका के साधन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि गरीबी से स्थायी मुक्ति के लिए परिवारों को रोजगार और कमाई के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
इस अभियान के तहत खेती, कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पशुपालन, बकरी व मछली पालन और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने की योजना है। चौहान के अनुसार इस पूरे अभियान में महिला किसानों की भूमिका केंद्रीय रहेगी, क्योंकि खेती-किसानी करने वाली महिलाएं ही गांव की गरीबी दूर करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
प्रोसेसिंग उद्योगों और आसान कर्ज पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने महिलाओं को केवल उत्पादन तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने दाल मिल, तेल मिल और टमाटर से केचप बनाने जैसे छोटे प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना का जिक्र किया। इसके लिए प्रशिक्षण, मशीनें, तकनीकी मदद और बिना गारंटी या कम गारंटी वाले ऋण की दिशा में काम करने की बात कही गई।
चौहान ने यह भी कहा कि महिला किसान संगठनों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को प्रोत्साहन दिया जाएगा तथा सरकारी खरीद में उन्हें प्राथमिकता मिलेगी। कार्यक्रम में उन्होंने महिला किसानों के साथ पौधरोपण भी किया और उनसे पौधरोपण अभियान से जुड़कर अपना नाम दर्ज कराने का आग्रह किया।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी माताओं-बहनों को भी मुस्कुराने और जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य गरीबी मुक्त गांव है, जहां हर परिवार की आय का साधन हो। उन्होंने महिलाओं से नए प्रकार की खेती के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि इसमें सरकार पूरी मदद करेगी।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिला किसान और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। हालांकि इस घोषणा से जुड़ी योजना का औपचारिक नाम, बजट राशि और क्रियान्वयन की समय-सीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। कृषि मंत्रालय की ओर से आने वाले दिनों में इसका विस्तृत खाका सामने आने की उम्मीद है।
देश में हर साल 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस मनाया जाता है, जिसका मकसद खेती-किसानी में महिलाओं के योगदान को पहचान देना है। सांची का यह सम्मेलन भी इसी कड़ी से जुड़ा बताया जा रहा है। खेत में बुवाई से लेकर कटाई, भंडारण और पशुपालन तक के ज्यादातर काम में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय से रही है, लेकिन अक्सर जमीन के कागजों में उनका नाम दर्ज न होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं और संस्थागत कर्ज का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाता।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भूमि के मालिकाना हक से अलग खेती में वास्तविक योगदान के आधार पर महिलाओं को किसान का दर्जा मिलता है, तो इससे उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड, बीमा योजनाओं और सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे महिला किसान उत्पादक संगठनों को भी बैंकों और सरकारी खरीद एजेंसियों से सीधे जुड़ने में मदद मिल सकती है।
रायसेन और विदिशा में शुरू होने वाला पायलट अभियान सफल रहने पर इसे आगे पूरे राज्य और संभवतः अन्य राज्यों में भी विस्तार देने पर विचार किया जा सकता है। मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार शुरुआती चरण में इन दो जिलों के चुने गए गांवों में सर्वेक्षण कर यह पता लगाया जाएगा कि किन परिवारों के पास अभी आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं है, ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर योजनाओं से जोड़ा जा सके।
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