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राज्य कृषि समाचार (State News)

शहडोल में धान पर सफेद माहू का हमला, समय पर नियंत्रण न होने पर 60 फीसदी तक नुकसान का खतरा

13 अक्टूबर 2026, शहडोल: शहडोल में धान पर सफेद माहू का हमला, समय पर नियंत्रण न होने पर 60 फीसदी तक नुकसान का खतरा – मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में धान की फसल पर सफेद माहू, यानी व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर का हमला बढ़ने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक समय पर नियंत्रण न हुआ तो उपज में 50 से 60 फीसदी तक नुकसान हो सकता है।

गोहपारू विकासखंड के पोंडी गांव समेत आसपास के कई खेतों में यह कीट दिखाई दे रहा है।

पोंडी गांव के किसान अरविंद यादव के मुताबिक उनके और आसपास के कई किसानों के खेतों में सफेद माहू का प्रकोप नजर आ रहा है। कुछ जगह फसल प्रभावित होती भी दिख रही है।

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बाली आने से पहले ही करता है हमला

कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी.के. प्रजापति के अनुसार यह कीट धान में बाली आने से पहले ही हमला कर देता है, इसलिए शुरुआती अवस्था में ही इसकी पहचान और नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि खेत में अतिरिक्त पानी जमा न रखें, यूरिया का इस्तेमाल बहुत कम करें या पूरी तरह रोक दें, और खेत की नियमित निराई-गुड़ाई करते रहें। खरपतवार कीट को छिपने की जगह देते हैं, इसलिए उन्हें हटाना जरूरी बताया गया है।

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कौन सी दवा, कितनी मात्रा में डालें

रासायनिक नियंत्रण के लिए थायोमेथोक्सम 25% WG की 5 ग्राम मात्रा प्रति टंकी, यानी लगभग 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। एक एकड़ के लिए करीब 10 टंकी, यानी 150 से 200 लीटर घोल की जरूरत पड़ती है।

शुरुआती अवस्था में नीम तेल का इस्तेमाल भी असरदार माना गया है। इसके लिए एक लीटर नीम तेल को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़का जा सकता है। जैविक खेती करने वाले किसानों के लिए “निमास्त्र” के इस्तेमाल की भी सलाह दी गई है, हालांकि इसकी सटीक मात्रा अलग से नहीं बताई गई है।

कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि किसी भी दवा का इस्तेमाल करने से पहले अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के कार्यालय से सही मात्रा और उपलब्धता की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि खेत की स्थिति और कीट के प्रकोप की मात्रा के हिसाब से सलाह बदल सकती है। शहडोल जिले में धान की फसल अभी बाली आने की अवस्था में है, इसलिए आने वाले दिनों में मौसम में नमी बढ़ने पर सफेद माहू का प्रकोप और इलाकों में फैलने की आशंका से किसान चिंतित हैं।

सफेद माहू यानी व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर एक रस चूसने वाला कीट है, जो पौधे के तने के निचले हिस्से में झुंड बनाकर बैठ जाता है और पत्तियों व तने से रस चूसता रहता है। लगातार रस चूसने से पौधा कमजोर पड़ जाता है, पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं, और गंभीर प्रकोप में पूरा पौधा अचानक सूख जाता है, जिसे किसान आमतौर पर “हॉपर बर्न” कहते हैं। क्योंकि यह कीट पौधे के निचले, छिपे हुए हिस्से में रहता है, इसलिए खड़ी फसल में शुरुआती प्रकोप का पता लगाना मुश्किल होता है और अक्सर नुकसान दिखने तक देर हो जाती है।

नमी और बादल छाए रहने वाला मौसम इस कीट के फैलने के लिए मुफीद माना जाता है। खेत में ज्यादा पानी भरा रहने और सघन बिजाई से भी कीट को फैलने में मदद मिलती है, इसलिए कृषि वैज्ञानिक खेत से अतिरिक्त पानी निकालने और उचित दूरी पर बिजाई करने की सलाह बार-बार देते हैं।

कृषि विभाग के मुताबिक गोहपारू विकासखंड के अलावा शहडोल जिले के अन्य धान बहुल इलाकों में भी किसानों को अपने खेत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है, ताकि कीट का प्रकोप बढ़ने से पहले ही नियंत्रण शुरू किया जा सके। फसल अभी बाली आने की अवस्था में है, जो धान की उपज तय करने का सबसे संवेदनशील समय माना जाता है, इसलिए इस दौरान लापरवाही का नुकसान सीधे पैदावार पर पड़ सकता है।

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