Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

जायद सीजन में कौन सी फसल बनेगी फायदे का सौदा? वैज्ञानिकों ने बताए बेहतर विकल्प

13 मई 2026, नई दिल्ली: जायद सीजन में कौन सी फसल बनेगी फायदे का सौदा? वैज्ञानिकों ने बताए बेहतर विकल्प – वैज्ञानिकों के अनुसार मूंग की विराट, शिखा, टीजेएम-3 और हम-16 किस्मों की बुवाई 15 मई तक की जा सकती है। बुवाई से पहले बीज का रायजोबियम और पीएसबी कल्चर से उपचार करने पर उत्पादन बेहतर मिलता है। इस फसल में 4 से 5 सिंचाई पर्याप्त होती हैं। उड़द की इंदिरा उड़द-1, टी-9 और प्रताप उड़द-1 किस्मों को हल्की-दोमट मिट्टी में बोने की सलाह दी गई है, जबकि खरपतवार नियंत्रण के लिए 25 दिन बाद निराई-गुड़ाई जरूरी बताई गई है।

मक्का की जेएम-216, एचएम-4 तथा संकर किस्मों की खेती से 5 से 6 सिंचाई में अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। वहीं बेबीकॉर्न की खेती 65 दिन में तैयार होकर किसानों को अतिरिक्त लाभ देती है। सूरजमुखी की केबीएसएच-44 और डीआरएसएच-1 किस्में कम सिंचाई में तैयार हो जाती हैं और परागण के लिए खेत के पास मधुमक्खी पालन करने से उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।

सब्जी और चारे की फसलें भी फायदेमंद

वैज्ञानिकों ने भिंडी, लौकी, करेला और तोरई जैसी सब्जियों की संकर किस्मों को भी लाभकारी बताया है। पानी की बचत के लिए ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग अपनाने की सलाह दी गई है। पशुपालक किसान चारे के लिए मक्का की अफ्रीकन टॉल और ज्वार की एमपी चरी किस्मों की बुवाई कर सकते हैं, जो 45 दिन में हरा चारा उपलब्ध करा देती हैं।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

किसानों के लिए सरकारी सहायता भी उपलब्ध

कृषि विभाग के अनुसार जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए मूंग और उड़द के प्रमाणित बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 55 प्रतिशत तक सब्सिडी, सोलर पंप पर 90 प्रतिशत तक अनुदान तथा कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा ‘एमपी किसान ऐप’ और कृषि चौपाल के माध्यम से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

सतत खेती पर जोर

विशेषज्ञों ने किसानों से नरवाई न जलाने और उसे खेत में मिलाकर जायद फसलों की बुवाई करने की अपील की है। उनका कहना है कि जायद फसलें 60 से 70 दिन में तैयार होकर खरीफ सीजन से पहले खेत खाली कर देती हैं और दलहनी फसलें होने के कारण मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं, जिससे लंबे समय तक खेती का लाभ मिलता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture