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राज्य कृषि समाचार (State News)

गेहूं की खेती: कम पानी में ज्यादा पैदावार के लिए अपनाएं ये 6 किस्में, जानें कब करें सिंचाई  

02 नवंबर 2026, भोपाल: गेहूं की खेती: कम पानी में ज्यादा पैदावार के लिए अपनाएं ये 6 किस्में, जानें कब करें सिंचाई – मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले में कम पानी और सीमित सिंचाई संसाधनों के बीच गेहूं की अच्छी पैदावार लेने के लिए किसानों को उन्नत किस्मों का चयन करने और पानी का सही प्रबंधन करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग के अनुसार, किसान कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली गेहूं की किस्मों को अपनाकर और फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं पर सिंचाई करके पैदावार बढ़ा सकते हैं। इसके लिए समय पर बुवाई, बीजोपचार और वैज्ञानिक खेती तकनीकों का पालन करना भी जरूरी है।

कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली गेहूं की 6 किस्में

कृषि विभाग ने जिले की जलवायु और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली गेहूं की छह किस्में अपनाने की सलाह दी है। इनमें DBW 110, HI 1655, HI 1544, LOK-1, HI 1605 और HI 1650 शामिल हैं। सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में किसान इन किस्मों का चयन कर सकते हैं।

पानी की उपलब्धता के अनुसार ऐसे करें सिंचाई

गेहूं की फसल में पानी की उपलब्धता के अनुसार सही समय पर सिंचाई करना जरूरी है। कृषि विभाग ने किसानों को निम्न तरीके अपनाने की सलाह दी है।

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  • एक सिंचाई उपलब्ध होने पर: बुवाई के 20 से 25 दिन बाद, यानी क्राउन रूट इनिशिएशन अवस्था में पहली सिंचाई करें।
  • दो सिंचाई उपलब्ध होने पर: पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद और दूसरी बालियां निकलने के समय करें।
  • तीन सिंचाई उपलब्ध होने पर: पहली सिंचाई 20 से 25 दिन बाद, दूसरी 45 से 50 दिन बाद बालियां निकलते समय और तीसरी दाने की दूधिया अवस्था में लगभग 80 से 90 दिन के आसपास करें।

फसल की इन महत्वपूर्ण अवस्थाओं पर सिंचाई करने से सीमित पानी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।

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नवंबर में करें गेहूं की बुवाई

कृषि विभाग के अनुसार, गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए नवंबर के पहले सप्ताह से मध्य सप्ताह तक बुवाई करना उचित है। समय पर बुवाई करने से पौधों का विकास अच्छा होता है और मिट्टी में मौजूद नमी का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। सामान्य सिंचित परिस्थितियों में प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलोग्राम प्रमाणित बीज का उपयोग करने की सलाह दी गई है। बुवाई से पहले बीजोपचार अवश्य करें। साथ ही, सीड ड्रिल की मदद से उचित गहराई और दूरी पर कतारों में बुवाई करें।

खरपतवार नियंत्रण से बचाएं मिट्टी की नमी

खेत में खरपतवार होने से फसल के साथ पानी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। इसलिए समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें, ताकि खरपतवार मिट्टी की नमी का अधिक उपयोग न कर सकें और फसल को पर्याप्त नमी मिलती रहे। यदि किसान के पास स्प्रिंकलर सेट उपलब्ध है, तो पारंपरिक बहाव पद्धति के स्थान पर फव्वारा यानी स्प्रिंकलर पद्धति से सिंचाई कर सकते हैं। इससे पानी की बचत करने में मदद मिलती है।

वैज्ञानिक तरीके अपनाकर बढ़ाएं उत्पादन

कृषि विभाग ने किसानों को गेहूं की बेहतर पैदावार और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए अनुशंसित किस्मों का चयन करने, समय पर बुवाई करने, संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने और सिंचाई का कुशल प्रबंधन करने की सलाह दी है। इन उपायों को अपनाकर किसान उपलब्ध पानी का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त कर लाभ बढ़ाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।

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