धान की खेती में बढ़ानी है कमाई? अपनाएं श्री विधि, मिलेगा दोगुना फायदा
30 जून 2026, भोपाल: धान की खेती में बढ़ानी है कमाई? अपनाएं श्री विधि, मिलेगा दोगुना फायदा – मध्यप्रदेश के रीवा जिले में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए श्री (एसआरआई) विधि अधिक लाभकारी साबित हो सकती है। कृषि विभाग ने किसानों से इस तकनीक को अपनाने की अपील की है। विभाग के अनुसार, इस विधि से कम पानी और कम बीज में पारंपरिक रोपा विधि की तुलना में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इससे खेती की लागत घटती है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
श्री विधि से बढ़ेगा उत्पादन, घटेगी लागत
उप संचालक कृषि यू.पी. बागरी ने बताया कि जिले में अधिकांश किसान पारंपरिक रोपा विधि से धान की खेती करते हैं। इस विधि में प्रति हेक्टेयर औसतन 20 से 25 क्विंटल उत्पादन मिलता है, जबकि श्री (एसआरआई) विधि अपनाने पर प्रति हेक्टेयर 35 से 50 क्विंटल तक धान का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। इस तकनीक में कम पानी, कम बीज और बेहतर प्रबंधन के कारण उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
सिर्फ 6 से 8 किलो बीज की होती है जरूरत
उन्होंने बताया कि श्री विधि से धान की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर केवल 6 से 8 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। नर्सरी विशेष प्लेट या पॉलीथीन में तैयार की जाती है। इसके लिए भुरभुरी मिट्टी और राख का उपयोग किया जाता है। 10 मीटर लंबी और 5 सेंटीमीटर ऊंची क्यारी बनाकर उसमें लगभग 50 किलोग्राम नाडेप या गोबर की खाद मिलाई जाती है। बीजों की बुवाई से पहले उन्हें थायरम दवा से उपचारित करना चाहिए तथा प्रत्येक क्यारी में लगभग 120 ग्राम बीज बोना चाहिए। इसके बाद हल्की सिंचाई कर नर्सरी तैयार की जाती है।
ऐसे करें खेत की तैयारी और रोपाई
कृषि विभाग के अनुसार, खेत की पहले गहरी जुताई कर खरपतवार नष्ट करें और पर्याप्त पानी देकर रोपाई के लिए खेत तैयार करें। नर्सरी में तैयार 15 से 21 दिन पुराने पौधों की रोपाई करें। खेत में मार्कर हल की सहायता से 20-20 सेंटीमीटर की दूरी पर निशान बनाएं और प्रत्येक स्थान पर केवल एक पौधा लगाएं। इससे पौधों को पर्याप्त हवा, प्रकाश और नमी मिलती है, जिससे उनकी बढ़वार बेहतर होती है।
खरपतवार नियंत्रण और उर्वरक प्रबंधन पर दें ध्यान
श्री विधि में कतारों के बीच पर्याप्त दूरी होने से खरपतवार निकालना आसान होता है। कोनावीडर की मदद से खरपतवार निकालकर उन्हें खाद के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। गोबर की खाद, नाडेप खाद और वर्मी कम्पोस्ट का अधिक उपयोग करने की सलाह दी गई है। धान रोपाई के लगभग 15 दिन बाद आवश्यकता अनुसार कम मात्रा में यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है।
कम पानी में भी होगी अच्छी खेती
कृषि विभाग ने बताया कि श्री विधि की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि खेत में लगातार पानी भरकर रखने की आवश्यकता नहीं होती। केवल खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। पौधों की बढ़वार के दौरान खेत को 2 से 3 दिन तक सूखा छोड़कर फिर हल्की सिंचाई करने से पौधों का विकास बेहतर होता है और पानी की भी बचत होती है।
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