प्रदेश में यूरिया संकट ?

Share this

प्रदेश में यूरिया संकट ?

मक्का, कपास के किसान परेशान

20 जुलाई 2020, भोपाल। प्रदेश में यूरिया संकट – राज्य के कई जिलों में जरूरत के वक्त यूरिया खाद नहीं मिल पा रही है जिससे खरीफ फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इस वक्त फसलों को पोषक तत्व की आवश्यकता है। किसान परेशान हो रहा है, न तो सोसायटी में खाद मिल रही है और न ही निजी विक्रेताओं के यहां उपलब्ध है और यदि कहीं बोरी मिल भी रही है तो किसान को दोगुना दाम चुकाना पड़ रहा है। कहीं यूरिया का अवैध परिवहन हो रहा है तथा जप्ती की कार्यवाही की जा रही है। ऐसे में शासन दावा कर रहा है कि यूरिया की कोई कमी नहीं है। फिर किसान को क्यों उपलब्ध नहीं हो पा रहा है जबकि मुख्यमंत्री की अतिरिक्त यूरिया आवंटन की मांग भी केन्द्र ने मान ली है, इसके बावजूद सोसायटी से किसानों का खाली हाथ लौटना यूरिया संकट की तरफ इशारा कर रहा है।

राज्य में अब तक 146 लाख 31 हजार हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 111 लाख 53 हजार हेक्टेयर में बोनी कर ली गई है इसे देखते हुए यूरिया की मांग भी बढ़ी है तथा आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही जिससे फसलों की बढ़वार प्रभावित हो रही है। कपास एवं मक्का की फसल बढ़वार ठिटक गई है।

मंदसौर जिला के ग्राम ढावला गुर्जर निवासी श्री गौतम पाटीदार यूरिया नहीं मिलने से परेशान हैं। शामगढ़ सहकारी समिति के 4 बार चक्कर लगा चुके हैं। समिति में 10-15 दिन में एक ट्रक यूरिया आता है जो कुछ ही देर में समाप्त हो जाता है।

खंडवा जिले के कालाआम खुर्द ग्राम के कृषक श्री दिनेश लोवंशी बताते हैं कि 25 जून तक समिति में यूरिया था किन्तु बाद में समाप्त हुआ तो अभी तक नहीं आया। क्षेत्र में मक्का फसल का इस बार रकबा बढ़ा है जिससे यूरिया की तत्काल आवश्यकता है। समीप 7 कि.मी. आशापुर में निजी विक्रेताओं के यहां 400/- से 450/- रु. में यूरिया मिल रहा है।

बड़वानी जिले के निवाली विकासखंड के ग्राम जामन्या के कृषक श्री राधेश्याम सिसोदिया बताते हैं कि यहां न तो सहकारी समिति न ही विक्रेताओं के पास यूरिया है। प्रतिदिन यूरिया क्रय की कोशिश कर रहे हैं। इस संदर्भ में सभी किसानों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन भी दिया था किन्तु आज तक यूरिया नहीं मिला।

सहकारी क्षेत्र में स्थिति

धार जिले के माण्डवी ग्राम के युवा कृषक श्री दिनेश पाटीदार बताते हैं कि सहकारी समिति में पिछले सात दिनों में यूरिया नहीं है। तहसील की अधिकतर समिति में यूरिया सीमित मात्रा में आ रहा है।

मंडलेश्वर क्षेत्र में खरीफ की बोवनी के बाद फसलों को यूरिया देने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसके लिए किसान सहकारी समितियों में कतार में लगे हैं, जहाँ उन्हें उनकी मांग की तुलना में यूरिया की बहुत कम आपूर्ति की जा रही है। 10 बोरी की जगह 4 बोरी दी जा रही है. इससे किसान असंतुष्ट हैं। इस बारे में आ. जा. सेवा सहकारी समिति मंडलेश्वर के प्रबंधक श्री सुनील पाटीदार ने कृषक जगत को बताया कि समिति में 1100 किसान सदस्य हैं। यहां यूरिया की 350 टन, डीएपी की 250 टन और इफको की 150 टन की मांग है , लेकिन इसके विरुद्ध 189 टन यूरिया, 150 टन डीएपी और 50 टन इफको आया है, जो मांग की तुलना में बहुत कम है। इस कारण किसानों को 4 -4 बोरी उर्वरक दिया जा रहा है। वहीं किसान मित्र श्री संजय पाटीदार का कहना है कि क्षेत्र में 25 मई से कपास की बोवनी शुरू हुई थी जो 5 जून तक चली थी। सवा माह की इस फसल को यूरिया की जरूरत है। इसके अभाव में पौधों की वृद्धि रुक रही है।

ऐसे ही हालात करीबी गाँव सोमाखेड़ी की सहकारी समिति का भी है। इस समिति के प्रबंधक श्री कैलाश पाटीदार ने बताया कि समिति में 1600 सदस्य हैं। 500 टन यूरिया की मांग पर केवल 180 टन यूरिया ही आया है, जिसे किसानों को 5 -5 बोरी वितरित किया है। श्री पाटीदार ने बताया कि समिति में यूरिया नहीं होने से किसान बाज़ार से महंगे दाम पर यूरिया खरीद रहा है।

व्यापार जगत की पीड़ा

विनायक अभिकरण सेंधवा जिला बड़वानी के श्री गोपी किशन अग्रवाल यूरिया संकट पर कंपनियों को कम उत्पादन करने का कारण मानते हैं एवं लॉकडाउन से ट्रान्सपोर्ट व्यवसाय, डीजल कीमतों में उछाल भी इसके कारण है।
कोठारी फर्टिलाइजर्स अलीराजपुर के श्री जिगेश कोठारी कहते हंै कि शासन के निर्देशानुसार सहकारी समितियों को 80 प्रतिशत एवं 20 प्रतिशत निजी विक्रेताओं के माध्यम से विक्रय का नियम भी यूरिया संकट का कारण है। क्योंकि कई सहकारी समितियों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं रहती एवं अनेक समितियों में कृषक सदस्य नहीं रहते यह भी कारण है।

शासन का पक्ष

इधर सरकार का कहना है कि राज्य में यूरिया की कमी नहीं है। गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक अधिक यूरिया वितरण किया गया है। सरकार के मुताबिक चालू खरीफ में कुल 25.10 लाख टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा गया है जबकि गत खरीफ में कुल 23.58 लाख टन उर्वरक वितरित किया गया था। इस वर्ष केवल यूरिया का ही 11 लाख टन वितरण लक्ष्य है तथा 5.75 लाख टन की अतिरिक्त मांग मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री से की है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 6.17 लाख टन वितरण किया गया है। इसमें 4 लाख टन यूरिया सहकारी क्षेत्र से वितरित किया गया है। इस जुलाई माह में भारत सरकार से अब तक 2 लाख 6 हजार टन यूरिया प्राप्त हुआ है इसमें से 1 लाख 60 हजार टन यूरिया मार्कफेड के माध्यम से बांटा गया तथा गत वर्ष जुलाई माह में मार्कफेड के माध्यम से 1 लाख 20 हजार टन यूरिया वितरित किया गया था।

बहरहाल एक ओर सरकार यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता का दावा कर रही है तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है। किसान यूरिया के अभाव में अपनी फसल बचाने के लिए परेशान है। सोसायटियों के चक्कर लगा रहे हैं परन्तु उसे निराशा ही हाथ लग रही है। यदि यही स्थिति रही तो मक्का एवं कपास के किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा साथ ही आगामी दिनों में धान किसानों को भी यूरिया की जरूरत पड़ेगी जो सरकार के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं होगा।

Share this
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

16 + 6 =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।