राज्य कृषि समाचार (State News)

मेडिसिटी परियोजना अंतर्गत मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल का 27 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा

05 फरवरी 2026, उज्जैन: मेडिसिटी परियोजना अंतर्गत मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल का 27 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा – सिंहस्थ २०२८ को लेकर विभिन्न प्रोजेक्ट पर तेजी से काम किया जा रहा है ताकि इन्हें तय समय सीमा पर पूरा किया जा सके। इसी कड़ी में मेडिसिटी परियोजना अंतर्गत मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल का 27 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा छात्रावास के 4 बहुमंजिला भवनों का काम छत तक पूरा किया जा चुका है। फिलहाल तेजी से इसका काम किया जा रहा है।

 21 नवंबर 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने करीब 592.33 करोड़ रुपए की लागत से 14.97 एकड़ जमीन पर बनने वाली मप्र की पहली हाईटेक मेडिसिटी और शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का भूमिपूजन किया था। इस योजना के तहत नए अस्पताल, कॉलेज और हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। यह मेडिसिटी शहर और आसपास के इलाकों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करेगी। इससे हजारों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। यह परियोजना राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी। बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के डीजीएम निशांत पचौरी,, प्रबंधक फैजान हुसैन और तरुण मित्रा की टीम द्वारा इस प्रोजेक्ट को लीड किया जा रहा है। साथ ही जे पी स्ट्रक्चर गुजरात इसकी कॉन्ट्रैक्ट फर्म है। 

पिछले साल 23 दिसंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और सीएम डॉ. मोहन यादव मेडिसिटी पहुंचे थे। यहां उन्होंने काम की प्रगति देखी और अब तक क्या-क्या काम हुआ, इसकी जानकारी संबंधित इंजीनियर से ली थी। मेडिसिटी परियोजना में शहर में 150 सीट का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, 550 बेड का सुपर और मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल, 11 ऑपरेशन थिएटर, आधुनिक लाइब्रेरी, 276 वाहन क्षमता की मल्टीलेवल कार पार्किंग और 1211 बेड के चार हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा डायग्नोस्टिक सेंटर, फार्मेसी, चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान केंद्र, वेलनेस केंद्र, आयुष अस्पताल, पैरामेडिकल कॉलेज, एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं, ईको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर और स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा देने वाली सुविधाएं भी होंगी। यह योजना सिंहस्थ 2028 के पहले पूरी कर शहर में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। इससे गंभीर रोगों के इलाज के लिए अन्य शहरों पर निर्भरता कम होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा रोगियों का इलाज किया जाएगा। मेडिकल शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 

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