राज्य कृषि समाचार (State News)

उमरिया: कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलों का उत्पादन करें कृषक

28 जून 2026, उमरियाउमरिया: कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलों का उत्पादन करें कृषक – उप संचालक कृषि ने बताया कि आगामी खरीफ सीजन में एल-नीनो के प्रभाव तथा कम वर्षा की संभावित स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग, उमरिया द्वारा किसानों के लिए विशेष कृषि आकस्मिक (ब्वदजपदहमदबल) योजना तैयार की गई है। किसानों से अपील की गई है कि वे कम पानी की उपलब्धता की स्थिति में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाकर अपनी लागत एवं उत्पादन को सुरक्षित रखें।

  उप संचालक कृषि ने  बताया कि सीमित जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसान धान की पारंपरिक रोपाई के स्थान पर डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) पद्धति से सीधी बुवाई करें, जिससे पानी की पर्याप्त बचत होगी। साथ ही, संकर (हाइब्रिड) धान के बजाय कम अवधि में पकने वाली किस्मों जैसे जेआर-206, जेआर-201 एवं आईआर-64 का चयन करें। उप संचालक कृषि ने बताया कि यदि 15 जुलाई तक पर्याप्त वर्षा नहीं होती है, तो किसान धान के स्थान पर कम पानी में होने वाली मोटे अनाज की फसलें जैसे कोदो, कुटकी एवं रागी की बुवाई को प्राथमिकता दें। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि सोयाबीन, मूंग एवं उड़द जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बुवाई रिज एवं फरो (मेड़ एवं नाली) पद्धति से करें। इससे कम वर्षा की स्थिति में नमी का संरक्षण होता है तथा अधिक वर्षा होने पर जल निकास भी सुगमता से हो जाता है। सूखे के जोखिम को कम करने के लिए सोयाबीन अरहर (4:2) अथवा मक्का अरहर (2:1) की अंतरवर्तीय खेती अपनाने की भी सलाह दी गई है।

उप संचालक ने  कहा कि इस वर्ष कम वर्षा एवं सूखे की संभावना को देखते हुए सभी किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अपनी फसलों का बीमा अनिवार्य रूप से कराएं, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उप संचालक कृषि ने किसानों से खेतों में समय पर मेड़बंदी, जल संचयन तथा निराई-गुड़ाई कर मिट्टी की नमी संरक्षित रखने की अपील की। साथ ही मृदा परीक्षण की अनुशंसा के अनुसार संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने तथा नाइट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग विभाजित मात्रा में करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मौसम में हो रहे परिवर्तनों को देखते हुए किसान कृषि विभाग एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा समय-समय पर जारी मौसम आधारित कृषि सलाह का पालन करें।

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