राज्य कृषि समाचार (State News)

पारंपरिक खेती से नहीं चला घर, मशरूम उत्पादन ने बदली मिथिला दीदी की जिंदगी; अब हर माह 50 हजार की कमाई  

09 सितंबर 2026, रायपुर: पारंपरिक खेती से नहीं चला घर, मशरूम उत्पादन ने बदली मिथिला दीदी की जिंदगी; अब हर माह 50 हजार की कमाई – पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी के बीच परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में परेशानी का सामना कर रही रायपुर के खोरीगांव की मिथिला नायक दीदी ने मशरूम उत्पादन को आजीविका का नया जरिया बनाया। मेहनत, प्रशिक्षण और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग के दम पर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की और अब मशरूम उत्पादन से हर महीने करीब 50 हजार रुपये की आमदनी अर्जित कर रही हैं। बरमकेला विकासखंड के ग्राम पंचायत खोरीगांव की रहने वाली मिथिला नायक ने आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली के माध्यम से वित्तीय सहयोग मिला। इसी सहायता से उन्होंने मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया।

1.50 लाख रुपये से शुरू किया कारोबार

मिथिला दीदी ने मशरूम उत्पादन के लिए शुरुआती पूंजी के तौर पर 1.50 लाख रुपये जुटाए। इसमें 1.20 लाख रुपये का ऋण सखी क्लस्टर संगठन से लिया गया, जबकि 30 हजार रुपये अपनी व्यक्तिगत बचत से लगाए। शुरुआत में तापमान नियंत्रण, मार्केटिंग और तकनीकी जानकारी की कमी जैसी चुनौतियां सामने आईं। लेकिन प्रशिक्षण और लगातार प्रयासों से उन्होंने मशरूम उत्पादन की तकनीक सीखी और धीरे-धीरे इसे सफल आजीविका गतिविधि में बदल दिया।

घर से उत्पादन, स्थानीय बाजार में बिक्री

बेहतर गुणवत्ता वाले मशरूम की स्थानीय बाजार में मांग बढ़ने लगी। वर्तमान में मिथिला दीदी अपने घर से ही मशरूम उत्पादन कर स्थानीय बाजार में इसकी बिक्री करती हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह करीब 50 हजार रुपये की आय हो रही है। उनकी सफलता अब क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। मिथिला दीदी ने साबित किया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद प्रशिक्षण, मेहनत और उपलब्ध योजनाओं का सही उपयोग कर महिलाएं स्वरोजगार के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

योजनाओं के सहयोग से बढ़ा आत्मनिर्भरता का रास्ता

राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है। जिला प्रशासन की मॉनिटरिंग और जमीनी स्तर पर मार्गदर्शन से योजनाओं का लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है। मिथिला दीदी की पहल भी इसी दिशा में एक उदाहरण है, जहां मशरूम उत्पादन ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर उनके लिए नियमित आय का नया रास्ता तैयार किया है।

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