टीकमगढ़ : मछलियों की मृत्यु के कारणों की जांच हेतु पहुंची संयुक्त टीम
19 जून 2026, टीकमगढ़: टीकमगढ़ : मछलियों की मृत्यु के कारणों की जांच हेतु पहुंची संयुक्त टीम – ग्राम लोहारा (लुहर्रा) स्थित तालाब में बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की सूचना प्राप्त होने पर कृषि विज्ञान केंद्र, टीकमगढ़ और मत्स्य विभाग, टीकमगढ़ की एक संयुक्त टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। इस संयुक्त टीम में कृषि विज्ञान केंद्र से मत्स्य पालन वैज्ञानिक डॉ. सतेन्द्र कुमार, सहायक संचालक (मछली पालन) श्रीमती मेघा गुप्ता एवं मत्स्य निरीक्षक श्री पंकज मौर्या शामिल थे।
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि तालाब की लगभग सभी मछलियां मर चुकी थीं, जिनमें छोटी से लेकर बड़ी मछलियां तक शामिल थीं। ज्यादातर मृत मछलियों के मुंह खुले हुए पाए गए और उनसे सड़न की तीव्र बदबू आ रही थी। तालाब में पानी का स्तर अत्यंत कम पाया गया, जिसके कारण ऑक्सीजन के स्तर में उतार-चढ़ाव की प्रबल संभावना है। तालाब का जलस्तर अत्यंत कम पाया गया। वहीं, गांव के मवेशियों को तालाब में पानी पीते हुए पाया गया, जिससे यह प्रतीत होता है कि वर्तमान में तालाब का पानी मवेशियों को नुकसान नहीं पहुंचा रहा है।
संयुक्त टीम द्वारा तैयार पंचनामे के अनुसार, मछलियों की मृत्यु के पीछे कारण संभावित हो सकते हैं, जिसमें तालाब में पानी का स्तर बहुत कम होने से सुबह और शाम के समय ऑक्सीजन की उपलब्धता प्रभावित होना, स्थानीय लोगों और टीम द्वारा शाम के समय हुई वर्षा के कारण पानी के तापमान में अचानक बदलाव की भी आशंका जताई गई है। साथ ही स्थानीय निवासियों द्वारा तालाब में किसी जहरीले पदार्थ के उपयोग किए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।घटना स्थल पर मौजूद वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय नागरिकों और मत्स्य पालकों को महत्वपूर्ण सलाह दी है कि मृत मछलियों को तालाब के आसपास न छोड़ें, बल्कि उन्हें गड्ढे खोदकर मिट्टी में गहराई तक दफना दें। बीमारियों के किसी भी संभावित संक्रमण को रोकने के लिए तालाब के चारों ओर चूने का छिड़काव करें। तत्काल तालाब के पानी का उपयोग न करे. सिंचाई के लिए अत्यधिक सावधानी के साथ करें और विशेषज्ञों के निर्देशों का पालन करें।मत्स्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने ग्रामीणों और मत्स्य पालकों को सलाह दी है कि वे घबराएं नहीं और किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें। डॉ. बी.एस. किरार ने जिले के मत्स्य पालकों से अपील की है कि वे प्रतिदिन सुबह तालाब का निरीक्षण करें और मछलियों के व्यवहार पर पैनी नजर रखें। किसी भी प्रकार की आकस्मिक समस्या या तकनीकी जानकारी के लिए किसान सीधे कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ के विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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