महिला किसान लक्ष्मीबाई का कमाल! 3000 स्क्वेयर फीट में शुरू की गुलाब की खेती, अब हर महीने कमा रहीं ₹4 लाख
15 अप्रैल 2026, भोपाल: महिला किसान लक्ष्मीबाई का कमाल! 3000 स्क्वेयर फीट में शुरू की गुलाब की खेती, अब हर महीने कमा रहीं ₹4 लाख – मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के ग्राम बरखेड़ा बोंदर की महिला किसान श्रीमती लक्ष्मीबाई कुशवाह ने आधुनिक खेती के क्षेत्र में प्रेरणादायक सफलता हासिल की है। उद्यानिकी विभाग की सहायता और संरक्षित खेती (पॉलीहाउस तकनीक) अपनाकर उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है।
पारंपरिक खेती से आधुनिक तकनीक तक सफर
लक्ष्मीबाई कुशवाह पहले पारंपरिक खेती जैसे धान, सोयाबीन और गेहूं पर निर्भर थीं, जिसमें मेहनत अधिक और मुनाफा सीमित था। लेकिन वर्ष 2021-22 में उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से संरक्षित खेती की ओर कदम बढ़ाया।
उन्होंने लगभग 3000 वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस का निर्माण कराया, जिसकी कुल लागत करीब 25 लाख 32 हजार रुपये रही। इसमें शासन की ओर से लगभग 12 लाख 66 हजार रुपये का अनुदान भी मिला।
तीन पॉलीहाउस तक पहुंचा सफर
शुरुआत में एक पॉलीहाउस से शुरू हुई यह पहल अब तीन पॉलीहाउस तक विस्तार पा चुकी है। इनमें वे गुलाब सहित विभिन्न फूलों की खेती कर रही हैं। पॉलीहाउस में तैयार होने वाले कट फ्लॉवर की मांग लगातार बढ़ रही है।
रोजाना हजारों फूलों का उत्पादन
लक्ष्मीबाई के पॉलीहाउस में प्रतिदिन लगभग 3 से 4 हजार कट फ्लॉवर का उत्पादन हो रहा है। इन फूलों की सप्लाई भोपाल, इंदौर सहित मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों के अलावा अन्य राज्यों के बड़े बाजारों तक की जा रही है।
इससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 10 से 12 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। वहीं, उनकी मासिक आय बढ़कर करीब 3 से 4 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
तकनीक और मार्गदर्शन से मिली सफलता
लक्ष्मीबाई का कहना है कि पहले पारंपरिक खेती में लागत अधिक और लाभ कम होता था, लेकिन उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और संरक्षित खेती तकनीक ने उनकी जिंदगी बदल दी। पॉलीहाउस तकनीक ने उन्हें मौसम की अनिश्चितताओं से भी बचाया और बेहतर गुणवत्ता वाले फूल उत्पादन में मदद की।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल
आज लक्ष्मीबाई न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता दर्शाती है कि यदि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किया जाए, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।
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