प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली सरिता के जीवन की दिशा
03 जनवरी 2026, छिन्दवाड़ा: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली सरिता के जीवन की दिशा – जिले के विकासखंड मोहखेड़ के ग्राम खुनाझिर खुर्द की श्रीमती सरिता सिंगारे आज मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। वे पहले तालाब और जलाशयों में पारंपरिक तरीके से मछली पालन करती थीं, जिससे उन्हें लगभग ₹30,000 प्रति माह की आय होती थी। सीमित संसाधनों और पारंपरिक तकनीक के कारण आय में अधिक वृद्धि संभव नहीं हो पा रही थी।
वर्ष 2020 में श्रीमती सरिता ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत बायो फ्लॉक तकनीक से मत्स्य पालन करने के लिए मत्स्य विभाग में आवेदन किया। योजना के तहत ₹7.50 लाख की इकाई लागत में से ₹4.50 लाख का अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने अपनी निजी भूमि पर बायो फ्लॉक प्रणाली स्थापित की और आधुनिक तकनीक को अपनाया। बायो फ्लॉक तकनीक अपनाने के बाद उनके मत्स्य पालन व्यवसाय में क्रांतिकारी बदलाव आया। आज श्रीमती सरिता प्रति वर्ष लगभग 10 टन मछली का उत्पादन कर रही हैं, जिससे उनकी वार्षिक आय 7 से 8 लाख रुपये तक पहुँच गई है। यह उनके लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बनी।
इतना ही नहीं, श्रीमती सरिता ने नवाचार की दिशा में भी कदम बढ़ाया। वे बरसात के मौसम में बायो फ्लॉक तकनीक के माध्यम से मछलियों का प्रजनन और मत्स्य बीज का उत्पादन भी कर रही हैं। उत्पादित मत्स्य बीज को आसपास के कृषकों को विक्रय कर वे अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनकी आमदनी और अधिक बढ़ गई है। श्रीमती सरिता सिंगारे की सफलता की यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही योजना, आधुनिक तकनीक और मार्गदर्शन के साथ कोई भी व्यक्ति अपने व्यवसाय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि उनके मत्स्य पालन व्यवसाय को एक नई पहचान और दिशा भी दी है।
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