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राज्य कृषि समाचार (State News)

निजी कृषि कॉलेजों में डिग्री का खेल? किसानों का भविष्य दांव पर, जांच और कार्रवाई जरूरी

लेखक: सचिन बोंद्रिया

15 अक्टूबर 2026, इंदौर: निजी कृषि कॉलेजों में डिग्री का खेल? किसानों का भविष्य दांव पर, जांच और कार्रवाई जरूरी – केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का निजी कृषि महाविद्यालयों में डिग्री बांटने की दुकानों और फर्जी डिग्रियों पर रोक लगाने संबंधी बयान कृषि शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसे व्यवस्था की खामियों को दूर करने की जरूरत की स्वीकारोक्ति के रूप में भी देखा जा सकता है। सवाल है कि यदि निजी कृषि महाविद्यालयों में निर्धारित मानकों के उल्लंघन की आशंका है, तो अब तक उनकी निगरानी कितनी प्रभावी रही है?

मध्यप्रदेश में भोपाल, सागर और ग्वालियर सहित देशभर के निजी कृषि महाविद्यालयों की नियमित कक्षाओं, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, प्रयोगशालाओं और ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव एवं प्रसार कार्यक्रमों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शिकायतों को नजरअंदाज करने के बजाय उनकी जांच की जाए और अनियमितताएं प्रमाणित होने पर जिम्मेदार संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।

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सबसे बड़ा सवाल—बिना व्यावहारिक ज्ञान के कृषि विशेषज्ञ किसानों का मार्गदर्शन कैसे करेंगे? मिट्टी की जांच, फसल रोगों की पहचान, कीट प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती का ज्ञान केवल किताबों से नहीं, खेतों में प्रशिक्षण से भी मिलता है। यदि विद्यार्थियों को यह अनुभव नहीं मिलेगा, तो उनकी रोजगार क्षमता प्रभावित हो सकती है और किसानों तक पहुंचने वाली तकनीकी सलाह की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

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प्रस्तावित एग्रीकल्चर काउंसिल केवल घोषणा बनकर न रह जाए। निजी कृषि महाविद्यालयों के लिए स्पष्ट मानक, नियमित निरीक्षण, उपस्थिति का सत्यापन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए। फर्जी डिग्री या प्रमाणपत्र जारी करने का मामला प्रमाणित होने पर जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, निर्दोष विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य की रक्षा भी सुनिश्चित हो।

अब सवाल कार्रवाई का है, आश्वासन का नहीं। कृषि शिक्षा को डिग्री वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों और विज्ञान के बीच मजबूत कड़ी बनाना होगा। निजी कृषि महाविद्यालयों की जवाबदेही तय किए बिना गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा का लक्ष्य अधूरा रहेगा। आखिर दांव पर केवल विद्यार्थियों की डिग्री नहीं, किसानों की मेहनत, उनकी फसल और देश की कृषि व्यवस्था का भरोसा भी है।

जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल : उल्लेखनीय है कि देश में बिना निर्धारित मानकों के संचालित हो रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार जल्द एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन करेगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित पूसा में एग्री विज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।

श्री चौहान ने कहा कि कृषि शिक्षा के नाम पर केवल फीस लेकर डिग्रियां बांटने वाले संस्थानों को मनमानी की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य कृषि शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और विद्यार्थियों की डिग्रियों की विश्वसनीयता बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि बीएससी (एग्रीकल्चर) और एमएससी (एग्रीकल्चर) जैसी तकनीकी डिग्रियों का महत्व बना रहना चाहिए, ताकि कृषि क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके। प्रस्तावित एग्रीकल्चर काउंसिल के माध्यम से कृषि शिक्षा के नियमन और मानकों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

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