राजस्थान: आत्मा योजना के तहत रबी पूर्व कृषक गोष्ठी आयोजित, किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में बताया एसएसपी का उपयोग
15 अक्टूबर 2026, जयपुर: राजस्थान: आत्मा योजना के तहत रबी पूर्व कृषक गोष्ठी आयोजित, किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में बताया एसएसपी का उपयोग – राजस्थान कृषि विभाग की आत्मा योजना के तहत ग्राम अमावरा में रबी फसलों की बुवाई से पूर्व कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को सरसों, चना एवं गेहूं की उन्नत खेती, बीज दर, उर्वरक प्रबंधन, बीजोपचार, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा कृषि विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर वैज्ञानिक तरीके से खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। गोष्ठी में सहायक निदेशक कृषि सियाराम मीना ने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से योजनाओं का लाभ लेने, नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने तथा खेती में अनावश्यक लागत कम करके उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने का आह्वान किया।
सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी ने सरसों, चना एवं गेहूं की वैज्ञानिक खेती के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रबी फसलों में अच्छी पैदावार प्राप्त करने के लिए समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा फसल की शुरुआती अवस्था में उचित देखभाल बेहद महत्वपूर्ण है।
डीएपी के विकल्प के रूप में बताया एसएसपी का उपयोग
सहायक कृषि अधिकारी ने किसानों को डीएपी के विकल्प के रूप में सिंगल सुपर फॉस्फेट (एसएसपी) के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एसएसपी से फसल को फास्फोरस के साथ सल्फर भी मिलता है। सल्फर विशेष रूप से सरसों जैसी तिलहनी फसलों के लिए उपयोगी पोषक तत्व है। उन्होंने समझाया कि डीएपी के स्थान पर एसएसपी अपनाते समय फसल की आवश्यकता के अनुसार फास्फोरस की समतुल्य मात्रा सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि फसल को नाइट्रोजन की आवश्यकता हो, तो उसकी पूर्ति अलग से संतुलित मात्रा में यूरिया या अन्य उपयुक्त स्रोत से करनी चाहिए। उर्वरकों का चयन मिट्टी परीक्षण और कृषि विभाग की अनुशंसाओं के आधार पर करने की सलाह भी दी गई।
सरसों, चना और गेहूं की खेती के बताए तरीके
सरसों की खेती के संबंध में किसानों को क्षेत्र और किस्म के अनुसार समय पर बुवाई करने, संतुलित उर्वरक देने तथा सल्फर की आवश्यकता पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई। फसल की शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण और नियमित निरीक्षण से उत्पादन में सुधार किया जा सकता है। चना की खेती के लिए बीजोपचार के बाद बुवाई करने तथा दलहनी फसल होने के कारण राइजोबियम कल्चर और अनुशंसित फॉस्फोरस प्रबंधन पर ध्यान देने को कहा गया। किसानों को खेत में जलभराव से बचने और फसल में रोग एवं कीटों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई।
वहीं, गेहूं की खेती के लिए क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त किस्म का चयन कर समय पर बुवाई करने पर जोर दिया गया। बीज दर, कतार से कतार की दूरी और उर्वरक की मात्रा का निर्धारण बुवाई की विधि, किस्म तथा मिट्टी की स्थिति के अनुसार करने की जानकारी दी गई। साथ ही, फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं में जरूरत के अनुसार सिंचाई करने की सलाह दी गई। किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित बीज खरीदने, बुवाई से पहले बीजोपचार करने तथा बिना आवश्यकता के उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करने के लिए जागरूक किया गया। फसल में कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर पहले उनकी सही पहचान करने और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही अनुशंसित दवा का उपयोग करने पर जोर दिया गया।
खाद, बीज और दवाइयां खरीदते समय पक्का बिल लेने की सलाह
सहायक कृषि अधिकारी सुमित भारद्वाज ने किसानों को खाद, बीज एवं कीटनाशक दवाइयां अधिकृत विक्रेताओं से उचित दर पर खरीदने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक खरीद पर पक्का बिल अवश्य लें और बिल पर उत्पाद का नाम, मात्रा तथा मूल्य की जांच करें। किसानों को बिना बिल सामग्री खरीदने, अनावश्यक उत्पाद लेने और जबरन टैगिंग के प्रति सतर्क रहने के लिए भी जागरूक किया गया। कृषि पर्यवेक्षक श्री शिवकेश ने किसानों को कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और अन्य उपयोगी कृषि गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी संबंधित कृषि कार्यालय से प्राप्त कर समय पर आवेदन करने का आग्रह किया।
मिट्टी परीक्षण से कम होगी खेती की लागत
गोष्ठी में किसानों को बुवाई से पहले खेत की मिट्टी की जांच करवाकर उसकी पोषक तत्व स्थिति के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी गई। इससे अनावश्यक खाद खर्च कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और फसल की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है। किसानों को फसल चक्र अपनाने, खेत में उपलब्ध नमी का समुचित उपयोग करने तथा कृषि आदानों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने के लिए भी प्रेरित किया गया।
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