तहसील कार्यालय ने राज्य सूचना आयोग को लिया हल्के में ! 25 हजार जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद आदेश की डाक लौटी
पांढुर्ना में प्रशासनिक लापरवाही का मामला, कलेक्टर को जांच कर कार्रवाई के निर्देश
31 अक्टूबर 2026, भोपाल: तहसील कार्यालय ने राज्य सूचना आयोग को लिया हल्के में ! 25 हजार जुर्माने की कार्रवाई के बावजूद आदेश की डाक लौटी – मध्यप्रदेश के पांढुर्ना जिले के तहसील कार्यालय की कार्यप्रणाली का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राज्य सूचना आयोग द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जारी आदेश की तामील तक नहीं हो सकी। आयोग का सरकारी पत्र इस टिप्पणी के साथ वापस लौट आया कि ‘प्राप्तकर्ता बिना पता दिए चले गए हैं।’ आयोग ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए पांढुर्ना कलेक्टर को मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
मामला राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन प्रकरण क्रमांक A-4930/2023 का है। आवेदक ने 24 मई 2023 को फसल नुकसान के पंचनामों की प्रतियां मांगी थीं। इसमें 4 फरवरी, 16 मार्च और 18 अप्रैल 2023 को तैयार किए गए पंचनामे शामिल थे। आवेदक ने आरोप लगाया था कि फसल नुकसान के पंचनामों में छेड़छाड़ की गई और वास्तविक जानकारी छिपाई गई। आवेदक के अनुसार, पंचनामों में खेतों के विवरण और नुकसान के प्रतिशत को लेकर भी गड़बड़ी की गई थी।
25 हजार रुपए तक के जुर्माने की कार्रवाई, फिर भी आदेश की अनदेखी – आयोग ने 20 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तहसीलदार पांढुर्ना वीर बहादुर सिंह धुर्वे के विरुद्ध सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत अधिकतम 25 हजार रुपए का अर्थदंड अधिरोपित करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया था। साथ ही धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा के लिए भी जवाब मांगा गया था।
आयोग ने लोक प्राधिकारी कलेक्टर पांढुर्ना को धारा 18(1) के तहत मामले की जांच कर एक माह में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने, संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां आवेदक को उपलब्ध कराने तथा दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
डाक पर लिखी टिप्पणी ने खोली प्रशासनिक व्यवस्था की पोल – 8 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में आयोग के सामने एक और गंभीर तथ्य आया। 20 अगस्त के आदेश के तहत तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तहसीलदार पांढुर्ना को भेजा गया सरकारी पत्र आयोग को वापस प्राप्त हुआ। लिफाफे पर डाक विभाग की टिप्पणी थी- ‘प्राप्तकर्ता बिना पता दिए चले गए हैं।’ आयोग ने इस स्थिति को तहसील कार्यालय की गंभीर अनियमितता और सरकारी पत्रों की तामील से बचने की प्रवृत्ति का संकेत माना।
आयोग ने आदेश दिया कि वापस प्राप्त डाक को मूल रूप से संलग्न कर पांढुर्ना कलेक्टर को भेजा जाए तथा इसकी जांच कर डाक लेने से इंकार करने अथवा सरकारी आदेश की तामील में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
तत्कालीन तहसीलदार अब जबलपुर में पदस्थ – सुनवाई में यह भी सामने आया कि तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी वीर बहादुर सिंह धुर्वे वर्तमान में जबलपुर जिले की आधारताल तहसील में तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। आयोग ने जबलपुर कलेक्टर को भी कारण बताओ सूचना-पत्र की तामील कराकर अगली सुनवाई से तीन दिन पहले तामील प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
18 नवंबर को फिर होगी सुनवाई – राज्य सूचना आयोग ने पांढुर्ना कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ को पुनः निर्देशित किया है कि 20 अगस्त के आदेश के पालन में जांच प्रतिवेदन आगामी सुनवाई में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। साथ ही वर्तमान लोक सूचना अधिकारी द्वारा आवेदक को जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में पालन प्रतिवेदन भी मांगा गया है। तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी वीर बहादुर सिंह धुर्वे की व्यक्तिगत सुनवाई 18 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे निर्धारित की गई है।
सरकारी आदेश का तामील न होना, डाक का बिना तामील लौटना और आयोग के पूर्व निर्देशों के बावजूद जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं होना पांढुर्ना के प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब निगाहें कलेक्टर की जांच और राज्य सूचना आयोग की अगली सुनवाई पर हैं।
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