राज्य कृषि समाचार (State News)

तमिलनाडु के किसान ने नई तकनीक से तीन गुना बढ़ाई आम की पैदावार

16 सितंबर 2026, थेनी (तमिलनाडु): तमिलनाडु के किसान ने नई तकनीक से तीन गुना बढ़ाई आम की पैदावार – तमिलनाडु के थेनी जिले के अंडीपट्टी क्षेत्र में किसान एम. सुरेश ने अति उच्च घनत्व रोपण तकनीक (UHDP) अपनाकर आम की खेती से अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा लिया है। पारंपरिक तरीके से जहां प्रति एकड़ 4-5 टन आम का उत्पादन होता था, वहीं नई तकनीक से अब 10-12 टन प्रति एकड़ तक उत्पादन मिल रहा है, कुछ खेतों में तो यह आंकड़ा 15 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

एम. सुरेश ने अपने अनुभव के बारे में कहा, “मैंने आम की खेती इसलिए शुरू की क्योंकि इसे साल में कम से कम दो बार काटा जा सकता है।” उनका यह फैसला अब बेहतर मुनाफे के तौर पर सामने आ रहा है।

पारंपरिक आम के बागों में पौधों के बीच काफी दूरी रखी जाती है, जिससे प्रति एकड़ पौधों की संख्या और शुरुआती उत्पादन दोनों सीमित रह जाते हैं। सघन रोपण तकनीक में पौधों के बीच की दूरी घटाकर प्रति एकड़ ज्यादा पौधे लगाए जाते हैं और छंटाई की वैज्ञानिक विधि अपनाई जाती है, जिससे पेड़ जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं।

पेड़ों की ऊंचाई नियंत्रित रखे जाने से छिड़काव और तुड़ाई का काम भी आसान हो जाता है, जिससे मजदूरी की लागत घटती है और समय की भी बचत होती है। पारंपरिक ऊंचे पेड़ों में जहां तुड़ाई के लिए सीढ़ी और ज्यादा मेहनत लगती थी, वहीं सघन बागों में यह काम जमीन से ही आसानी से हो जाता है।

कोका-कोला फाउंडेशन और सरकार की साझा पहल

इस बदलाव के पीछे कोका-कोला फाउंडेशन की “प्रोजेक्ट उन्नति” पहल का बड़ा योगदान है, जो 2023 में शुरू हुई थी और अब 55,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुकी है। इस परियोजना के तहत किसानों को सघन रोपण तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से बाग प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसके साथ ही तमिलनाडु सरकार ने बारिश पर निर्भर क्षेत्रों के किसानों को ड्रिप सिंचाई पर 100 प्रतिशत सब्सिडी देने की सुविधा दी है। इससे कम पानी में भी बेहतर सिंचाई संभव हो पाई है, जो सूखा-प्रभावित इलाकों के लिए बड़ी राहत है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है, इसलिए उत्पादकता बढ़ाने वाली ऐसी तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने से किसानों की आय और निर्यात, दोनों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

ड्रिप सिंचाई के साथ फर्टिगेशन यानी सिंचाई के पानी के जरिए ही पोषक तत्व देने की तकनीक भी जोड़ी जा रही है, जिससे खाद का इस्तेमाल ज्यादा सटीक तरीके से हो पाता है। इससे न सिर्फ पानी बल्कि खाद पर होने वाला खर्च भी नियंत्रित रहता है, जो थेनी जैसे बारिश पर निर्भर क्षेत्र के किसानों के लिए दोहरा फायदा है।

थेनी जिला दक्षिण भारत के प्रमुख आम उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है, और यहां की मिट्टी व जलवायु पारंपरिक रूप से आम की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती रही है। ऐसे में जब उत्पादकता बढ़ाने वाली नई तकनीक इसी इलाके में सफल होती है, तो आसपास के दूसरे किसानों के लिए भी उसे अपनाना आसान हो जाता है।

नवंबर-दिसंबर में मिलता है बेहतर दाम

नई तकनीक से तैयार आम की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जिससे किसानों को बाजार में अच्छा दाम मिलता है। नवंबर-दिसंबर के महीनों में आम करीब 30 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकता है, जो सामान्य सीजन की तुलना में किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

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