मूंग छोड़ चुकंदर की खेती अपनाई, अब किसान हरिशंकर राठौर की चार गुना बढ़ गई आय
08 जून 2026, भोपाल: मूंग छोड़ चुकंदर की खेती अपनाई, अब किसान हरिशंकर राठौर की चार गुना बढ़ गई आय – खेती में नवाचार और नई फसलों को अपनाने की सोच किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। इसका जीवंत उदाहरण नीमच जिले के मनासा विकासखंड के ग्राम नलखेड़ा के प्रगतिशील किसान हरिशंकर राठौर हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत चुकंदर जैसी एक्सोटिक सब्जी की खेती अपनाकर उन्होंने न केवल अपनी खेती का स्वरूप बदला, बल्कि आय में भी चार गुना से अधिक वृद्धि हासिल की है। उनकी सफलता आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।
सीमित आय से जूझ रहे थे किसान
हरिशंकर राठौर ने बताया कि पहले वे करीब 0.950 हेक्टेयर भूमि पर मूंग की खेती करते थे। इस फसल में लगभग 30 हजार रुपये की लागत आती थी और 8 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। इससे उन्हें करीब 64 हजार रुपये की कुल आय होती थी, जबकि शुद्ध लाभ केवल 34 हजार रुपये ही बच पाता था। सीमित आय के कारण खेती से अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा था।
कृषि विभाग की सलाह से बदली दिशा
कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत चुकंदर जैसी उच्च मूल्य वाली एक्सोटिक सब्जियों की खेती करने की सलाह दी। योजना के अंतर्गत उन्हें 22,800 रुपये का अनुदान मिला। इसके साथ ही उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती की तकनीक, ड्रिप सिंचाई और फसल प्रबंधन का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया गया।
कृषि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से प्रेरित होकर हरिशंकर ने परंपरागत फसल की जगह चुकंदर की खेती का निर्णय लिया और नई तकनीकों का उपयोग करते हुए फसल उत्पादन शुरू किया।
उत्पादन और मुनाफे में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
चुकंदर की खेती के परिणाम उम्मीद से कहीं बेहतर रहे। 0.950 हेक्टेयर भूमि में उन्होंने 285 क्विंटल चुकंदर का उत्पादन प्राप्त किया। फसल पर लगभग 95 हजार रुपये की लागत आई, लेकिन बाजार में अच्छी मांग और बेहतर कीमत मिलने से उन्हें करीब 2 लाख 40 हजार रुपये की कुल आय हुई।
सभी खर्चों को निकालने के बाद हरिशंकर को 1 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। यह लाभ मूंग की खेती से मिलने वाले 34 हजार रुपये के मुकाबले चार गुना से भी अधिक है।
बाजार में मिली अच्छी मांग
हरिशंकर राठौर का कहना है कि चुकंदर की बाजार में लगातार मांग बनी हुई है। बेहतर गुणवत्ता और उचित प्रबंधन के कारण उन्हें उपज का अच्छा मूल्य मिला। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की तकनीकी सहायता और सरकारी योजना के सहयोग ने उनकी खेती को नई दिशा दी है।
उन्होंने कहा, “कृषि विभाग की सलाह पर मैंने चुकंदर की खेती शुरू की। शुरुआत में थोड़ा जोखिम जरूर लगा, लेकिन परिणाम बेहद सकारात्मक रहे। अब मेरी आय पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है।”
दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित
अपनी सफलता के बाद हरिशंकर अब आसपास के किसानों को भी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नई और अधिक लाभदायक फसलों की खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि वैज्ञानिक खेती और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर फसल चयन करने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
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