राज्य कृषि समाचार (State News)

लघु किसानों के लिए वरदान बन रही टिकाऊ कृषि प्रणाली, बढ़ेगी आय और खाद्य सुरक्षा

27 जून 2026, भोपाल: लघु किसानों के लिए वरदान बन रही टिकाऊ कृषि प्रणाली, बढ़ेगी आय और खाद्य सुरक्षा – भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम ही नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका और देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा का प्रमुख आधार भी है। विशेष रूप से बिहार जैसे राज्यों में, जहां 90 प्रतिशत से अधिक किसान लघु एवं सीमांत श्रेणी के हैं, कृषि आज भी अधिकांश परिवारों की आय का मुख्य स्रोत है।

हालांकि, छोटे किसानों के सामने खेती को लाभकारी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार घटती कृषि जोत, खेती में बढ़ती लागत, प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण, जलवायु परिवर्तन के कारण बदलता मौसम और कृषि आय में अस्थिरता जैसी समस्याएँ उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति दोनों को प्रभावित कर रही हैं।

किसानों के सामने प्रमुख चुनौतियां

कृषि जोत का लगातार छोटा होना।
बीज, उर्वरक, सिंचाई और अन्य कृषि आदानों की बढ़ती लागत।
मिट्टी की उर्वरता और जल संसाधनों में गिरावट।
जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा, सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियाँ।
कृषि आय में अनिश्चितता और बढ़ता आर्थिक जोखिम।

समाधान है टिकाऊ कृषि प्रणाली

इन चुनौतियों से निपटने के लिए ऐसी कृषि प्रणालियों की आवश्यकता है जो उत्पादकता, लाभप्रदता और पर्यावरणीय स्थिरता तीनों को एक साथ बढ़ा सकें। टिकाऊ कृषि प्रणाली के अंतर्गत जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीकों का उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया जाता है।

इस तरह की कृषि व्यवस्था न केवल उत्पादन बढ़ाने में मदद करती है, बल्कि खेती की लागत कम करती है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करती है और किसानों की आय को अधिक स्थिर एवं सुरक्षित बनाती है।

भविष्य की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लघु एवं सीमांत किसानों को आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, वैज्ञानिक सलाह, बाजार तक बेहतर पहुंच और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ मिले, तो वे कम संसाधनों में भी अधिक उत्पादन और बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

बदलते समय में टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल कृषि ही भारतीय कृषि का भविष्य है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा भी लंबे समय तक सुनिश्चित की जा सकेगी।

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