फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुपर सीडर या हैप्पी सीडर है बेस्ट ऑप्शन , समय के साथ पैसों की भी होगी बचत
29 नवंबर 2025, भोपाल: फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सुपर सीडर या हैप्पी सीडर है बेस्ट ऑप्शन , समय के साथ पैसों की भी होगी बचत – फसलों की कटाई के बाद उनके जो अवशेष खेत में रह जाते हैं, उसे नरवाई या पराली कहते हैं। कम्बाइन हार्वेस्टर से फसल की कटाई करने पर बड़ी मात्रा में नरवाई खेत में रह जाती है, जिससे दूसरी फसल की बुवाई में परेशानी होती है । इसको हटाने के लिए किसान प्रायः इसे जला देते हैं। इससे खेत की माटी की उपरी परत में रहने वाले मिटटी के लिए उपयोगी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। मिट्टी में कड़ापन आ जाता है और इसकी जलधारण क्षमता बहुत कम हो जाती है। किसान नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों जैसे सुपर सीडर या हैप्पी सीडर का उपयोग करें।
इन उपकरणों के उपयोग से नरवाई को नष्ट करके खाद बना दिया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। नरवाई जलाने से मिट्टी को होने वाले नुकसान और धुएं से होने वाला पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता है। किसान धान तथा अन्य फसलों की नरवाई खेत से हटाने के लिए सुपर सीडर और हैप्पी सीडर का उपयोग करें। ये उपकरण किसी भी ट्रैक्टर जो ५० एच पी के हों उसमें आसानी से फिट हो जाते हैं। इनके उपयोग से एक ही बार में नरवाई नष्ट होने के साथ-साथ खेत की जुताई और बुवाई हो जाती है। इससे जुताई का खर्च और समय दोनों की बचत होती है। इसके अलावा किसान ट्रैक्टर में स्ट्राबेलर का उपयोग करके नरवाई को खाद में बदल सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र,उमरिया और कृषि आभियांत्रिकी विभाग,उमरिया के संयुक्त तत्वाधान में ग्राम बिरसिंहपुर, बिलासपुर और धमोखर में सुपर सीडर द्वारा गेहू की फसल की बुवाई करके प्रदर्शन किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डा के पी तिवारी ने बताया की धान के फसल यदि हार्वेस्टर से की जाती है तो खेत में फसल के अवशेष रह जाते हैं जिनकी सफाई के बिना बुवाई करना बहुत बड़ी चुनौती रहती है लेकिन सुपर सीडर एक ऐसी मशीन है जो बिना सफाई के आसानी से गेहूं या चना की बुवाई कर सकती है। नरवाई जलाने से मिट्टी में उत्पन्न होने वाले कार्बनिक पदार्थ में कमी आ जाती है। सूक्ष्मजीव जलकर नष्ट हो जाते है तथा हवा भी प्रदूषित हो जाती है । जिसके फलस्वरूप जैविक खाद का निर्माण बंद हो जाता है। भूमि की ऊपरी परत में ही पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध रहते है। आग लगाने के कारण ये पोषक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र उमरिया के वैज्ञानिक डा धनंजय सिंह ने बताया की फसल अवशेषों को जलाने की बजाए उनको वापस भूमि में मिला देने से कई लाभ होते हैं। जैसे कि कार्बनिक पदार्थ की उपलब्धता में वृद्धि, पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि, मृदा भौतिक गुणों के सुधार होते हैं।
फसल उत्पादकता में वृद्धि आती है। कुंदन मुवेल ने बताया की खेतो में नरवाई का उपयोग खाद एवं भूसा बनाने में करें। नरवाई से कार्बनिक पदार्थ भूमि में जाकर मृदा पर्यावरण में सुधार कर सूक्ष्मजीवी अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं। जिससे कृषि टिकाऊ रहने के साथ-साथ उत्पादन में वृद्धि होती है। सुपर सीडर एक साथ तीन काम करती है जिससे हार्वेस्टर के बाद बचे फसल अवशेष को बारीक़ काट कर मिटटी में मिला देता है जिससे मिटटी में कार्बन कंटेंट बढ़ेगा। मिटटी उपजाऊ होगी और खेत में कटाई उपरांत तुरंत बोनी का कार्य हो जायेगा।
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