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राज्य कृषि समाचार (State News)

आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को 75% तक अनुदान, बिहार में शुरू हुई बगीचों में कीट प्रबंधन योजना

13 अगस्त 2026, पटना: आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को 75% तक अनुदान, बिहार में शुरू हुई बगीचों में कीट प्रबंधन योजना – बिहार सरकार ने आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों को राहत देते हुए ‘बगीचों में कीट प्रबंधन योजना’ शुरू की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू इस योजना के तहत किसानों को बगीचों में वैज्ञानिक तरीके से कीटनाशी का छिड़काव कराने पर 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य कीट एवं रोगों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के साथ फलों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाना है।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि उद्यानिकी फसलों में समय पर कीट एवं रोगों का नियंत्रण गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए बेहद जरूरी है। योजना के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुसार सुरक्षित और निर्धारित समय पर कीटनाशी छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे फसल को नुकसान से बचाने के साथ किसानों की उत्पादन लागत कम करने और आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आम के लिए प्रति पेड़ 72 रुपए तक अनुदान

योजना के तहत आम के बगीचों में पहले छिड़काव के लिए 57 रुपए प्रति वृक्ष और दूसरे छिड़काव के लिए 72 रुपए प्रति वृक्ष की दर से 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा।

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इसी तरह अमरूद के बगीचों में पहले छिड़काव के लिए 33 रुपए प्रति वृक्ष और दूसरे छिड़काव के लिए 45 रुपए प्रति वृक्ष की दर से 75 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।

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लीची किसानों को भी मिलेगा लाभ

लीची उत्पादकों के लिए पहले छिड़काव पर 162 रुपए प्रति वृक्ष और दूसरे छिड़काव पर 114 रुपए प्रति वृक्ष की दर से 75 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है। इससे लीची के बगीचों में कीट एवं रोग नियंत्रण को प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
ऑनलाइन आवेदन की सुविधा

कृषि मंत्री ने बताया कि योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान कृषि विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने आम, अमरूद और लीची उत्पादक किसानों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

सरकार के अनुसार, यह योजना बिहार में उद्यानिकी फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने, कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान को कम करने और बागवानी को किसानों के लिए अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। वैज्ञानिक तरीके से कीट प्रबंधन होने से फलों की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ बाजार में किसानों को बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

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