इस साल सोयाबीन की खेती हो सकती है ₹15000 रु. प्रति हेक्टेयर तक महंगी
04 जुलाई 2026, नई दिल्ली: इस साल सोयाबीन की खेती हो सकती है ₹15000 रु. प्रति हेक्टेयर तक महंगी – प्रदेश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ सोयाबीन उत्पादक किसानों के सामने बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। किसानों का मानना है कि उर्वरकों की कीमतों में वृद्धि, डीजल खर्च और मौसम की अनिश्चितता के कारण इस वर्ष सोयाबीन की खेती पिछले वर्षों की तुलना में महंगी पड़ सकती है।
राज्य में सोयाबीन की बुआई का प्रमुख समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के पहले पखबाड़े तक माना जाता है। ऐसे में किसान बीज, खाद और कृषि यंत्रों की व्यवस्था में जुटे हैं। सोयाबीन उत्पादन लागत में सबसे बड़ा हिस्सा बीज, उर्वरक, श्रम और पौध संरक्षण पर होने वाले खर्च का होता है।
हाल ही में कुछ प्रमुख उर्वरकों के दाम बढ़ने से किसानों की लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। दूसरी ओर, डीजल आधारित कृषि कार्यों की लागत बढ़ने से जुताई, बुवाई और परिवहन खर्च भी प्रभावित हो सकते हैं।
खाड़ी देशों के संकट के कारण डीजल की कीमतों में लगभग 7 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि हुई है। वहीं माफेक्स ने भी खाद की कीमतों में वृद्धि की है। हालांकि यूरिया एवं डीएपी के कीमतें स्थिर रखी गई हैं, परन्तु अन्य उर्वरकों की कीमतें बढ़ी हैं जिससे सोयाबीन की लागत में 10 से 15 हजार रुपये तक बढ़ने की संभावना है।
उर्वरकों की कीमतें बढ़ीं
प्रदेश में माफेक्स ने फर्टिलाइजर की दरें बढ़ाई हैं। नई दरों के तहत, एनपीके (12:32:16) और एनपीके 10:26:26 के 50 किलो. बैग की कीमत अब 2,450 रुपये होगी, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इसकी कीमत 1,720 रुपये थी, जो काफी बढ़ोतरी को दिखाता है। अन्य उर्वरकों की कीमतों में भी लगभग 100-400 रुपये तक बढ़ाए गए हैं। मध्य प्रदेश में इस वर्ष भी लगभग 54 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन लेने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों का कहना
हरदा जिले के ग्राम कनोड़ा के कृषक श्री बृजमोहन जोशी का कहना है कि सोयाबीन की बुवाई वर्तमान में चल रही है। खाद, बीज एवं डीजल के दामों में बढ़ोतरी के कारण इस वर्ष एक हेक्टेयर में 35 से 40000 रुपये लागत आने की संभावना है, जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 10 से 15000 रुपये ज्यादा है।
शाजापुर जिले के कालापीपल के कृषक श्री जय नारायण पाटीदार कई वर्षों से सोयाबीन की अच्छी खेती कर रहे हैं एवं अच्छा उत्पादन भी लेते हैं। इनका कहना है कि जिले में खाद की कमी है, जो किसान को चाहिए वह उपलब्ध नहीं है, जो उपलब्ध है उसके दाम इस वक्त सीधे डबल हो गए हैं, वहीं डीजल भी महंगा है। एक हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती की लागत 25 हजार से 30 हजार रुपये आती थी
वह इस सीजन में बढ़कर 40 हजार से 45 हजार रुपये होने की संभावना है।
कृषि क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि मानसून सामान्य रहा और बाजार में सोयाबीन के बेहतर भाव मिले, तो किसानों को राहत मिल सकती है। हालांकि वर्षा में कमी या देरी की स्थिति में सिंचाई और फसल प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
प्रति हेक्टेयर लागत का अर्थशास्त्र
सोयाबीन की खेती में प्रति हेक्टेयर लगभग 25,000 से 35,000 रुपये तक की कुल अनुमानित औसत उत्पादन लागत आती है। भूमि की तैयारी, उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई, कीटनाशकों और कटाई का खर्च इसमें शामिल है।
अनुमानित लागत ( प्रति हेक्टेयर )
जुताई और खेत की तैयारी – 4,000–5,000 रुपये
बीज (लगभग 75–80 किलो) – 4,500–6,000 रुपये
उर्वरक एवं खाद – 4,000–5,500 रुपये
कीटनाशक और खरपतवार नाशक – 5,000–8,000 रुपये
सिंचाई और कृषि यंत्र – 2,500–4,000 रुपये
मजदूरी (बुवाई, निराई और कटाई) – 5,000–7,500 रुपये
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