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राज्य कृषि समाचार (State News)

सोलर पंप ने बदली किसान की खेती, बिजली बिल हुआ शून्य और सिंचाई हुई आसान

21 जुलाई 2026, बालाघाट: सोलर पंप ने बदली किसान की खेती, बिजली बिल हुआ शून्य और सिंचाई हुई आसान – कहते हैं कि खेती में समय पर पानी मिल जाए तो किसान की आधी चिंता अपने आप दूर हो जाती है। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के वारासिवनी तहसील के ग्राम डोके के किसान रामप्रसाद बिसेन के लिए भी अब यही हकीकत बन गई है। कभी बिजली कटौती और बढ़ते बिजली बिल से परेशान रहने वाले रामप्रसाद आज कुसुम-बी योजना के तहत लगाए गए सोलर पंप की बदौलत निश्चिंत होकर खेती कर रहे हैं।

रामप्रसाद बिसेन अपने चार एकड़ खेत में वर्षों से धान की खेती करते आ रहे हैं। धान की फसल लेने के बाद वे रबी सीजन में भी विभिन्न फसलें उगाते हैं। खेत में पहले से ट्यूबवेल और बिजली का पंप तो था, लेकिन सिंचाई हमेशा बिजली पर निर्भर रहती थी। बिजली का बिल लगातार बढ़ता जा रहा था और निर्धारित समय पर ही बिजली मिलने से फसलों को समय पर पानी देना मुश्किल हो जाता था। कई बार सिंचाई के बीच बिजली चली जाती थी, जिससे पूरी मेहनत पर पानी फिरने का डर बना रहता था।

बिजली का इंतजार खत्म, अब सूरज के साथ शुरू होती है सिंचाई

किसान रामप्रसाद बताते हैं कि पहले रात-दिन बिजली आने का इंतजार करना पड़ता था। जब बिजली मिलती थी, तभी खेत की सिंचाई कर पाते थे। बिजली का भारी बिल अलग से आर्थिक बोझ बन जाता था। ऐसे में खेती करना चुनौती से कम नहीं था। इसी बीच उन्हें प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत उन्होंने अपने खेत में 3 हॉर्सपावर क्षमता का सबमर्सिबल सोलर पंप स्थापित कराया। सोलर पंप लगने के बाद उनकी खेती की तस्वीर ही बदल गई।

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अब सूरज निकलते ही सिंचाई का काम शुरू हो जाता है। बिजली कटौती की चिंता खत्म हो गई है और बिजली बिल भी शून्य हो गया है। समय पर सिंचाई होने से फसलों की बढ़वार बेहतर हो रही है और उत्पादन बढ़ने की उम्मीद भी मजबूत हुई है। रामप्रसाद कहते हैं, “पहले सिंचाई के लिए बिजली का इंतजार करना पड़ता था और हर महीने भारी बिल भरना पड़ता था। अब सोलर पंप लगने के बाद जब जरूरत होती है, तब खेत में पानी उपलब्ध हो जाता है। इससे समय, मेहनत और पैसे तीनों की बचत हो रही है।”

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कुसुम-बी योजना किसानों के लिए बन रही वरदान

कृषि एवं अक्षय ऊर्जा विभाग के अनुसार कुसुम-बी योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह योजना किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाते हुए सिंचाई की लागत कम करने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। रामप्रसाद बिसेन की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को आधुनिक और टिकाऊ बना सकते हैं।

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