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राज्य कृषि समाचार (State News)

श्योपुर: नरवाई न जलाएं, बल्कि उसका प्रबंधन कर अतिरिक्त आय पाएं

30 अप्रैल 2026, श्योपुर: श्योपुर: नरवाई न जलाएं, बल्कि उसका प्रबंधन कर अतिरिक्त आय पाएं – जिले में गेहूं फसल की कटाई लगभग पूर्ण हो गई है, जिला प्रशासन ने किसान  भाइयों से अपील की है कि नरवाई में आग न लगाएं ,बल्कि उसका प्रबंधन कर अतिरिक्त आय प्राप्त करें। नरवाई  प्रबंधन के लिए जिले में 25 नोडल अधिकारी भी नियुक्त किये गये है, जो अपने-अपने क्षेत्र अंतर्गत ग्रामों में ग्रामीणों को नरवाई न जलाने के लिए प्रेरित करेंगे।

 कृषि विभाग द्वारा जारी की गई अपील में उप संचालक कृषि श्री जीके पचौरिया ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से एक टन गेहूं के भूसे में लगभग 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटेशियम, 1.2 किलोग्राम सल्फर, गेहूं द्वारा अवशोषित 50-70 प्रतिशत सूक्ष्म पोषक तत्व और 400 किलोग्राम कार्बन होता है, जो जलाने से नष्ट हो जाता है। मिट्टी का तापमान 150 से 170 सेंटीग्रेड तक बढ़ जाता है। इसके अलावा मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म एवं लाभदायक जीवाणु जलकर नष्ट हो जाते है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो जाती है एवं फसलों के लिए मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी हो जाती है एवं मिट्टी धीर-धीरे बंजर हो जाती हे जिसमें आवश्यक पोषक तत्वों का उपयोग करने पर भी फसलों का उत्पादन नहीं लिया जा सकता है। पोषक तत्वों के नुकसान के अलावा, मिट्टी के कुछ गुण जैसे मिट्टी का तापमान, पीएच, नमी, उपलब्ध फास्फोरस और मिट्टी के कार्बनिक पदार्थ भी नरवाई को जलाने से प्रभावित होते है। अनुमान है कि एक टन गेहूं की नरवाई जलाने से 11 किलोग्राम Particulate Matter (कणिका तत्व)(पी.एम.), 58 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1400 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 199 किलोग्राम राख और 1.2 किलोग्राम सल्फर डाइऑक्साइड, उत्सर्जित होती है। ये गैसें वायु की गुणवत्ता में गिरावट लाती है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है, जैसे नेत्र और त्वचा रोगों में वृद्धि, सूक्ष्म कण दीर्घकालिक ह्रदय और फेफड़ो के रोगो को बढाने के कारक है।

फसल अवशेषों का प्रबंधन करने से मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाना, फसल की उत्पादकता बढाना, उत्पादन लागत कम कर कृषकों की आय को बढ़ाना, फसल अवशेषों का समुचित सही उपयोग कर कृषकों की अतिरिक्त आय के विकल्प उपलब्ध कराना, फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम कर वायु प्रदूषण कम करना।

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उन्होंने किसान भाइयों से अपील की है कि गेहूं की नरवाई में आग नही लगाये, बल्कि स्ट्रॉ रीपर से भूसा बनाकर 2000 रुपये प्रति ट्रॉली की आय प्राप्त कर सकते है। इस भूसे को गौशालाओं एवं पशुपालकों को विक्रय कर सकते है। जिन किसान भाइयों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग एवं अन्य फसलें लगाई जा रही है, वह सुपर सीडर एवं अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग कर ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई कर सकते है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था से उक्त निर्देशों का उल्लंघन पाये जाने पर पर्यावरण मुआवजा अदा करना होगा। 02 एकड़ या उससे कम भूमि धारक 2500 रुपये प्रति घटना। 02 एकड़ से अधिक लेकिन 05 एकड़ से कम भूमि धारक 5000 रुपये प्रति घटना। 05 एकड़ से अधिक भूमि धारक 15000 रुपये प्रति घटना होगा।

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