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राज्य कृषि समाचार (State News)

शरद के नवाचार ने बढ़ाई प्रदेश की शान

21 नवम्बर 2020, इंदौर। शरद के नवाचार ने बढ़ाई प्रदेश की शान  – पराली की समस्या से पंजाब , दिल्ली, हरियाणा ,उत्तर प्रदेश के साथ ही म.प्र. भी परेशान है l  इसके समाधान के लिए  होशंगाबाद जिले के उन्नत कृषक श्री शरद वर्मा ने मक्का फसल के अवशेषों को लेकर जो नवाचार किया है , वह सम्भवतः म.प्र. में पहला है l इसमें फसल अवशेष से साइलेज बनाया जाता है , जिससे किसानों को जहां ज़्यादा मुनाफा मिलता है, वहीं पशुओं के दूध में फेट की मात्रा भी बढ़ती है l श्री शरद वर्मा के इस नवाचार ने प्रदेश की शान बढ़ा दी है l

मूलतः ग्राम घाटली ( इटारसी ) जिला होशंगाबाद के उन्नत कृषक श्री शरद वर्मा ने कृषक जगत को बताया कि 2016 में आस्ट्रेलिया /न्यूजीलैंड के दौरे पर गया था l वहां इसका प्रयोग होते देखा था ,तभी विचार किया था  कि इस मशीन की अपने देश में भी ज़रूरत है l अंततः ब्राजील की एक कम्पनी, जो इसे भारत में बनाती है, से सम्पर्क कर इसे 4 लाख रु. में खरीदा l इस स्वचालित मशीन से मक्का के फसल अवशेष से साइलेज बनाया जाता है l एयरटाइट एक बोरी में 50 किलो साइलेज आ जाता है l  इसकी 20 बोरियों को घर में रखना आसान है l पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं l यह समझिए यह पशुओं का अचार है l दूध भरे हरे भुट्टे के साइलेज से  पशुओं के दूध में फेट की मात्रा भी बढ़ती है l श्री वर्मा ने कहा कि फ़िलहाल मक्का 8 रु. किलो बिक रही है , जबकि यह साइलेज डेयरी वाले 500 रुपए क्विंटल में खरीद रहे हैं l अब तक 200 क्विंटल से अधिक साइलेज बना लिया है l इसकी अच्छी मांग निकल रही है l इससे पराली की समस्या के समाधान के साथ ही प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी l उल्लेखनीय है कि श्री वर्मा की पत्नी श्रीमती कंचन वर्मा को कृषि कर्मण अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है l

Video: शरद के नवाचार ने बढ़ाई प्रदेश की शान

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इस बारे में डॉ. के.के. मिश्रा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, क्षेत्रीय कृषि अनुसन्धान केंद्र , पंवारखेडा ने कृषक जगत को बताया कि श्री वर्मा का यह नवाचार हर दृष्टि फायदेमंद है l  पर्यावरण प्रदूषण के बचाव के साथ ही डेयरी वालों को 5 रु. किलो में पशुओं के लिए पौष्टिक आहार मिल रहा है, जबकि ,श्री दीपक वासवानी, सहायक यंत्री कृषि ने कृषक जगत को बताया कि म.प्र. में यह पहली मशीन है जिसे लखनऊ से लाया गया है l इनमें बने 4 ड्रम में मक्के की पराली की कटिंग, थ्रेशिंग और कॉम्प्रेस कर साइलेज बनाती है , जिसे 50  किलो के एयरटाइट बैग में रखा जाता है l  3 – 4 दिन सेट होने के लिए रखा जाता है l यह पशुओं के लिए बढ़िया आहार है l  वहीं श्री जितेन्द्र सिंह , उप संचालक कृषि , होशंगाबाद ने कृषक जगत को बताया कि श्री शरद वर्मा का मक्का के अपशिष्ट का यह नवाचार आम के आम , गुठलियों के दाम जैसा है l इससे पराली की समस्या भी रुकेगी और किसान को अतिरिक्त आय भी होगी l यह मशीन पोर्टेबल है , जिसे किसानों के खेत तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है l अभी इस मशीन पर अनुदान नहीं मिलता है l  इसे लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा , वहां से स्वीकृति मिलने पर अनुदान दिया जाएगा l इससे किसानों को लाभ होगा l

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