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राज्य कृषि समाचार (State News)

बिहार में प्राकृतिक खेती का बढ़ेगा दायरा, 5,700 हेक्टेयर का लक्ष्य

एक एकड़ तक किसानों को मिलेगा ₹4,000 प्रति एकड़ अनुदान, 800 कृषि सखियां देंगी तकनीकी जानकारी

20 अगस्त 2026, पटना: बिहार में प्राकृतिक खेती का बढ़ेगा दायरा, 5,700 हेक्टेयर का लक्ष्य – बिहार सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करा रही है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत चालू वर्ष में राज्य में 5,700 हेक्टेयर क्षेत्र को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए किसानों को अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र के लिए ₹4,000 प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जाएगा।

राज्य में प्राकृतिक खेती का आधार पहले से तैयार है। बिहार के सभी 38 जिलों में करीब 50 हजार किसान 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। सरकार अब इस दायरे को और विस्तारित करने की तैयारी में है। प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर गोबर, गोमूत्र सहित स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।800 कृषि सखियां संभालेंगी तकनीकी मार्गदर्शन

किसानों को प्राकृतिक खेती की तकनीक समझाने और खेत स्तर पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए राज्य में 800 कृषि सखियों का चयन किया गया है। इन्हें ₹5,000 प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। कृषि सखियां किसानों को प्राकृतिक संसाधनों से खाद एवं अन्य कृषि इनपुट तैयार करने, उनके उपयोग और प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों की जानकारी देंगी।

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266 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 266 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर स्थापित किए गए हैं। अब प्रत्येक तीन क्लस्टर पर दो बायो रिसोर्स सेंटर स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा बिहार राज्य जैविक मिशन योजना के तहत पक्का वर्मी कम्पोस्ट पिट, गोबर गैस इकाई और व्यावसायिक वर्मी कम्पोस्ट इकाई स्थापित करने पर भी किसानों को अनुदान दिया जा रहा है।

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अनाज से लेकर फल-सब्जियों तक खेती

राज्य में प्राकृतिक खेती के तहत धान और गेहूं के अलावा टमाटर, बैंगन, भिंडी, गोभी और मिर्च जैसी सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं ड्रैगन फ्रूट, अमरूद, पपीता और केला जैसे फलों की खेती भी प्राकृतिक तरीके से की जा रही है।

बाजार उपलब्ध कराना भी जरूरी

प्राकृतिक खेती का रकबा बढ़ाने के साथ किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना भी बड़ी चुनौती है। प्राकृतिक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और बिक्री व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने पर किसानों का उत्साह प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अनुदान और तकनीकी सहायता के साथ प्राकृतिक उत्पादों के लिए मजबूत बाजार, ब्रांडिंग और विपणन व्यवस्था विकसित करना भी जरूरी होगा। इससे किसानों को रसायन मुक्त खेती अपनाने का स्थायी आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

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