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राज्य कृषि समाचार (State News)

वैज्ञानिक हरा चारा उत्पादन से बढ़ेगी पशुपालकों की आय, महिला किसानों को मिला आधुनिक प्रशिक्षण

24 जून 2026, नई दिल्ली: वैज्ञानिक हरा चारा उत्पादन से बढ़ेगी पशुपालकों की आय, महिला किसानों को मिला आधुनिक प्रशिक्षण – पशुपालन को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), बिरौली एवं हाइफर इंटरनेशनल के सहयोग से एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में 30 महिला किसानों को वैज्ञानिक हरा चारा उत्पादन, संतुलित पशु पोषण तथा पशुओं के रोग प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिला पशुपालकों को ऐसी वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना था, जिससे वे कम लागत में गुणवत्तापूर्ण हरा चारा तैयार कर सकें, पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार ला सकें और दुग्ध उत्पादन के साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकें।

कार्यशाला में कृषि एवं पशुपालन विशेषज्ञों ने नेपियर घास, बरसीम, जई और मक्का जैसी उच्च गुणवत्ता वाली चारा फसलों की उन्नत खेती की तकनीकों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता पशुओं के संतुलित पोषण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इससे दूध उत्पादन बढ़ता है, पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और पशुपालन का खर्च भी कम होता है।

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विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि केवल हरा चारा उगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका वैज्ञानिक प्रबंधन, उचित कटाई, भंडारण तथा संतुलित आहार के रूप में उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही पशुओं के नियमित टीकाकरण, कृमिनाशन और समय पर स्वास्थ्य जांच पर विशेष जोर दिया गया, ताकि रोगों की रोकथाम सुनिश्चित की जा सके।

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कार्यशाला के दौरान महिला किसानों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं का समाधान भी प्राप्त किया। उन्हें आधुनिक पशुपालन तकनीकों के साथ चारा उत्पादन को स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला किसानों को इस प्रकार का नियमित प्रशिक्षण मिलता रहे, तो पशुपालन की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वैज्ञानिक हरा चारा उत्पादन से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा, दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में स्थायी सुधार आएगा। कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली और हाइफर इंटरनेशनल की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण तथा टिकाऊ पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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