तेलंगाना में अरहर की फसल में उकठा रोग का खतरा, जड़ सड़न से बचाव की सलाह
02 नवंबर 2026, जगतियाल: तेलंगाना में अरहर की फसल में उकठा रोग का खतरा, जड़ सड़न से बचाव की सलाह – जिले में अरहर यानी रेडग्राम की फसल पर भारी बारिश के बाद फाइटोफ्थोरा जड़ सड़न, जिसे उकठा रोग भी कहा जाता है, का खतरा बढ़ गया है। राज्य कृषि-मौसम सेवा केंद्र, हैदराबाद की ओर से जारी बुलेटिन में किसानों को खेत से अतिरिक्त पानी निकालने और समय पर दवा के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
यह बुलेटिन (संख्या 87/2026) 30 अक्टूबर को जारी हुआ है और आने वाले कुछ दिनों, यानी 4 नवंबर तक के लिए सलाह देता है। बुलेटिन के मुताबिक जिन खेतों में हाल की बारिश के बाद पानी जमा रहा है, वहां अरहर के पौधों में उकठा के लक्षण दिखने का खतरा ज्यादा है।
पहले पानी निकासी, फिर मेटालैक्सिल का ड्रेंचिंग
बुलेटिन में साफ कहा गया है कि अगर अरहर के पौधों में फाइटोफ्थोरा उकठा के लक्षण नजर आएं, तो सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी को उचित जल-निकासी नालियों के जरिए बाहर निकालना चाहिए। पानी निकलने और मौसम साफ होने के बाद ही आगे का उपचार करना चाहिए।
इसके बाद पौधों की जड़ों के पास मेटालैक्सिल दवा का 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से ड्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है। यानी यह घोल पौधे की जड़ के आसपास की मिट्टी में डाला जाता है, ताकि दवा सीधे जड़ों तक पहुंच सके और फंगस को आगे फैलने से रोक सके।
तेलंगाना में अरहर खरीफ सीजन की एक अहम दलहन फसल है, और जगतियाल इलाके में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। मौसम केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों की नियमित निगरानी करें और लक्षण दिखते ही समय पर उपाय करें, ताकि सीजन के आखिरी दौर में फसल को नुकसान से बचाया जा सके।
फाइटोफ्थोरा फंगस की वजह से होने वाला यह उकठा रोग खासतौर पर उन खेतों में ज्यादा फैलता है जहां पानी का सही निकास नहीं होता। अरहर की जड़ें लंबे समय तक पानी में डूबी रहने पर कमजोर पड़ जाती हैं, और इसी वजह से फंगस आसानी से पौधे को संक्रमित कर पाता है। इसलिए दवा के इस्तेमाल से पहले खेत में बनी जल-निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना सबसे जरूरी कदम माना जाता है।
बुलेटिन में किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे खेत की मेड़ों और नालियों की नियमित सफाई रखें, ताकि बारिश का पानी जल्दी निकल सके। जिन खेतों में लगातार जलभराव की समस्या रहती है, वहां अगले सीजन के लिए ऊंची क्यारी (रेज्ड बेड) पर बुवाई करने की सलाह भी कृषि विशेषज्ञ अक्सर देते हैं।
फाइटोफ्थोरा उकठा से प्रभावित पौधों की पत्तियां अचानक मुरझाने लगती हैं और कुछ ही दिनों में पूरा पौधा सूख जाता है, जबकि जड़ों में सड़न साफ दिखाई देती है। चूंकि यह रोग तेजी से पूरे खेत में फैल सकता है, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती लक्षण दिखते ही प्रभावित हिस्से का इलाज कर देना बाकी फसल को बचाने के लिए जरूरी है। जगतियाल के किसानों से कहा गया है कि किसी भी तरह की उलझन होने पर वे नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विस्तार अधिकारी से सलाह लें, ताकि दवा की मात्रा और इस्तेमाल के तरीके में कोई गलती न हो।
तेलंगाना में अरहर की फसल अभी फूल और फली बनने की अवस्था के करीब है, जो आगे की उपज के लिए सबसे अहम समय माना जाता है। मौसम केंद्र का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना कम है, इसलिए किसानों के पास खेत से पानी निकालने और दवा का छिड़काव करने के लिए अनुकूल मौका है। समय पर की गई यह कार्रवाई सीजन के आखिरी दौर में फसल को बड़े नुकसान से बचा सकती है।
कृषि अधिकारियों का यह भी कहना है कि एक बार फाइटोफ्थोरा उकठा से प्रभावित खेत में अगली बार अरहर लगाने से पहले बीज उपचार और मिट्टी की जांच कराना बेहतर रहता है, ताकि फंगस का असर दोबारा न हो। इलाके के कई किसान अब बुवाई के समय ही ऊंची क्यारी और सही दूरी रखने जैसे एहतियाती कदम अपनाने लगे हैं, जिससे अगले सीजन में इस बीमारी का खतरा कम किया जा सके।
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