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फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

फतेहपुर में धान पर पत्ती लपेटक कीट का खतरा बढ़ा, कृषि विभाग ने बताए बचाव के उपाय

07 अक्टूबर 2026, फतेहपुर: फतेहपुर में धान पर पत्ती लपेटक कीट का खतरा बढ़ा, कृषि विभाग ने बताए बचाव के उपाय – उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में धान की फसल पर पत्ती लपेटक कीट का खतरा तेजी से बढ़ गया है। हाल की भारी बारिश के बाद तापमान बढ़ने और खेतों में नमी अधिक रहने से यह कीट सक्रिय हुआ है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी रंजीत कुमार ने बताया कि यह कीट धान के पत्तों को आपस में लपेटकर उनके अंदर छिपकर नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है। उन्होंने किसानों से नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करते रहने की अपील की है।

जिले में इन दिनों धान की फसल बाल निकलने की अवस्था में है, जो कीट प्रकोप के लिहाज से सबसे संवेदनशील मानी जाती है। अगर इस समय समय रहते कीट पर नियंत्रण नहीं किया गया तो दाने भरने की प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे उत्पादन में कमी आने का खतरा बढ़ जाता है। जिला कृषि विभाग के मुताबिक पिछले एक सप्ताह में इस कीट से जुड़ी शिकायतें कई गांवों से मिली हैं, जिसके बाद विभाग ने यह एडवाइजरी जारी की है।

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नीम तेल और जैविक दवा से मिलेगा नियंत्रण

शुरुआती प्रकोप में किसान खेत में 10 से 12 मीटर लंबी रस्सी को फसल के ऊपर से खींचकर कीट की सूंडियों को गिरा सकते हैं। यह तरीका बिना किसी रसायन के भी कीट को काफी हद तक नियंत्रित कर सकता है और छोटे व मझोले किसानों के लिए कम खर्च में कारगर उपाय है।

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कृषि रक्षा अधिकारी के मुताबिक रस्सी खींचने की यह विधि खासतौर पर उन खेतों में असरदार साबित होती है जहां प्रकोप अभी शुरुआती अवस्था में है। इसके बाद अगर कीट की संख्या नहीं घटती तो ही रासायनिक या जैविक दवाओं का सहारा लेना चाहिए, ताकि अनावश्यक छिड़काव से बचा जा सके।

अगर प्रकोप ज्यादा हो तो किसान नीम के तेल का तीन से पांच मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं। इसके अलावा जैविक कीटनाशक बैसिलस थुरिंजिएंसिस का एक से डेढ़ ग्राम प्रति लीटर पानी के अनुपात में इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। दोनों ही उपाय जैविक होने की वजह से फसल और मिट्टी दोनों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।

कृषि रक्षा अधिकारी ने यह भी चेतावनी दी कि खेत में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन और यूरिया का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे पत्तियां कोमल हो जाती हैं और कीट का प्रकोप और बढ़ सकता है। फतेहपुर के अलावा आसपास के जिलों में भी हाल की बारिश के बाद धान में नमी से जुड़ी कीट समस्याएं सामने आ रही हैं, जिसे देखते हुए कृषि विभाग लगातार किसानों को सतर्क रहने की सलाह दे रहा है।

छिड़काव से पहले इन बातों का रखें ध्यान

कृषि विभाग के मुताबिक किसानों को छिड़काव के लिए सुबह या शाम का समय चुनना चाहिए, जब तेज धूप न हो, ताकि दवा का असर बेहतर तरीके से हो सके। छिड़काव से पहले खेत में पानी का स्तर इतना रखना चाहिए कि दवा पत्तियों पर अच्छी तरह चिपक सके।

विभाग ने यह भी सलाह दी है कि खेत की मेड़ों और आसपास की घास-फूस को साफ रखा जाए, क्योंकि इनमें भी कीट के अंडे और सूंडियां छिपी रह सकती हैं। किसानों को सामूहिक रूप से आसपास के खेतों में भी एक साथ निरीक्षण और छिड़काव करने की सलाह दी गई है, क्योंकि अलग-अलग समय पर छिड़काव करने से कीट एक खेत से दूसरे खेत में फैल सकता है।

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