राज्य कृषि समाचार (State News)

9 साल से प्राकृतिक खेती कर रहे रामदीन पटेल, कम लागत में कमा रहे अच्छा मुनाफा; अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा  

08 मई 2026, भोपाल: 9 साल से प्राकृतिक खेती कर रहे रामदीन पटेल, कम लागत में कमा रहे अच्छा मुनाफा; अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा – मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के विकासखंड पाटन के ग्राम जरौंद के कृषक रामदीन पटेल पिछले 9 वर्षों से रासायनिक खेती को पूरी तरह छोड़कर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपनी मेहनत और वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से न केवल खेती की लागत में भारी कमी की है, बल्कि भूमि की उर्वरता भी बढ़ाई है। उनके इस सफल प्रयोग ने उन्हें क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणा बना दिया है।

रामदीन पटेल बाजार से महंगे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक खरीदने के बजाय घर पर ही जैविक आदानों का निर्माण करते हैं। उनके फार्म पर जीवामृत, घनजीवामृत और अन्य जैविक रसायनों का उपयोग किया जाता है, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, पौधों की वृद्धि सुधारने और प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण में सहायक हैं। वे खट्टा, कड़वा और बेल आधारित जैव रसायनों का भी उपयोग करते हैं, जिससे फसलें रोगमुक्त रहती हैं।

जैविक आदानों से खेती में सुधार

कृषक रामदीन पटेल ने बताया कि घनजीवामृत बनाने के लिए देशी गाय का गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेसन और जीवित मिट्टी का उपयोग किया जाता है। इस मिश्रण को तैयार कर सुखाकर पाउडर के रूप में खेतों में उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है, केंचुओं की सक्रियता तेज होती है और नमी धारण क्षमता में सुधार होता है। वे बताते हैं कि घनजीवामृत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और यह गोबर खाद की तुलना में अधिक प्रभावी होता है।

जैविक हाट से मिल रहा उचित दाम

रामदीन पटेल अपने जैविक उत्पादों को जिले में लगने वाले साप्ताहिक जैविक हाट में बेचते हैं। रसायन मुक्त और शुद्ध प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का अच्छा और उचित मूल्य मिल रहा है। इससे उनकी आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।

अधिकारियों ने की सराहना

गुरुवार को अनुविभागीय कृषि अधिकारी डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने उनके खेत का निरीक्षण किया और जैविक आदानों की गुणवत्ता की सराहना की। इस दौरान कृषि विस्तार अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि रामदीन पटेल की यह पहल न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधार रही है, बल्कि खेती की लागत घटाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत उदाहरण है।

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