राजस्थान: खेती-किसानी में तकनीक का नया अध्याय, वाधवानी AI के साथ हुआ समझौता; किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
26 मई 2026, जयपुर: राजस्थान: खेती-किसानी में तकनीक का नया अध्याय, वाधवानी AI के साथ हुआ समझौता; किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा – राजस्थान के कृषि क्षेत्र को आधुनिकतम तकनीक से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और पूरी कृषि वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। पंत कृषि भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में कृषि विभाग, राजस्थान सरकार तथा देश के प्रतिष्ठित नॉट-फॉर-प्रोफिट संस्थान ‘लॉर्ड्स एजुकेशन एंड हेल्थ सोसाइटी’ (LEHS – वाधवानी एआई फाउंडेशन) के मध्य एक महत्वपूर्ण गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
95 लाख किसानों की ‘फार्मर आईडी’ बनी, राजस्थान बना अग्रणी राज्य-
इस अवसर पर कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री महोदय के निर्देशों के अनुरूप राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में कई बड़े नवाचार कर रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ‘एग्री-स्टैक’ के तहत राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहाँ निर्धारित लक्ष्य का 95 प्रतिशत पूरा करते हुए प्रदेश के लगभग 95 लाख किसानों की डिजिटल ‘फार्मर आईडी’ बनाई जा चुकी है।
यह फार्मर आईडी केवल एक नंबर नहीं है, बल्कि इसमें किसान के खसरा नंबर, भूमि विवरण और आधार नंबर सहित पूरी क्रेडेंशियल्स दर्ज हैं। इसके माध्यम से आगामी फसल बीमा और एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली के तहत यूरिया वितरण जैसी व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाकर इसके दुरुपयोग को पूरी तरह रोका जा सकेगा।
एआई तकनीक बनेगी किसानों का सुरक्षा कवच-
आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2026-27 की बजट घोषणा के अनुरूप राज्य में एआई-बेस्ड मॉडल्स और ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की दिशा में यह एमओयू एक मील का पत्थर साबित होगा। इस साझेदारी के तहत ‘वाधवानी एआई’ आगामी 3 वर्षों के लिए राज्य सरकार का निःशुल्क तकनीकी भागीदार बनकर कार्य करेगा, जिससे राजकोष पर कोई वित्तीय भार नहीं आएगा। इस तकनीक से फील्ड स्तर पर सूचना तंत्र सुदृढ़ होगा और अंतिम छोर पर बैठे
किसान तक कृषि सेवाओं को प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकेगा।
इन चार प्रमुख एआई (AI) समाधानों से बदलेगी खेती की सूरत-
1. एग्रीवाणी- यह एक बहुभाषी चैटबॉट मॉडल है, जिसमें किसान अपनी ही भाषा में वॉइस या टेक्स्ट के माध्यम से संवाद कर सकेंगे। यह एआई टूल किसानों की समस्याओं को सुनकर तत्काल तकनीकी समाधान प्रदान करेगा।
2. क्रोपस (Pest and Disease Surveillance)- कंप्यूटर विज़न आधारित इस प्रणाली से फसलों में लगने वाले कीड़ों और बीमारियों की सटीक पहचान की जा सकेगी। किसान खेत से ही फसल की फोटो खींचकर विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित त्वरित उपचार पा सकेंगे, जिससे फसल खराबे का जोखिम कम होगा।
3. सोयाबीन ग्रेन एनालाइजर (Soybean Grain Analyzer)- स्मार्टफोन आधारित इस ऐप से किसान मंडी जाने से पहले ही अपनी सोयाबीन की फसल की गुणवत्ता, ग्रेडिंग और प्रोटीन आदि का रियल-टाइम आकलन खुद कर सकेंगे, जिससे उन्हें उपज का सही मूल्य मिल सकेगा।
4. एग्री एआई कलेक्ट व न्यूज मॉनिटरिंग- यह टूल किसानों की फील्ड गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड रखने तथा प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय लेने के लिए कृषि से जुड़ी खबरों की निरंतर मॉनिटरिंग में सहयोग करेगा।इस अवसर पर कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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