राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

उर्वरक आपूर्ति संकट के बीच भारत ने संतुलित खाद उपयोग पर बढ़ाया जोर

25 मई 2026, नई दिल्ली: उर्वरक आपूर्ति संकट के बीच भारत ने संतुलित खाद उपयोग पर बढ़ाया जोर – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटों के कारण उर्वरकों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ऐसे समय में भारत सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों के बीच संतुलित उर्वरक उपयोग और मिट्टी स्वास्थ्य को लेकर बड़ा जागरूकता अभियान तेज कर दिया है।

केंद्र सरकार का कहना है कि खरीफ सीजन के लिए देश में फिलहाल पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं, लेकिन आयात लागत और परिवहन खर्च बढ़ने से दबाव लगातार बढ़ रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े उर्वरक उपभोक्ता देशों में शामिल है और फॉस्फेट तथा पोटाश जैसे कई प्रमुख उर्वरकों के लिए आयात पर काफी निर्भर है।

इसी पृष्ठभूमि में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा देशभर में किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को यूरिया के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी देना और मिट्टी परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा देना है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के माध्यम से अब तक 2.71 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा चुकी है, जबकि 7.17 लाख से ज्यादा किसानों को सीधे जागरूक किया गया है।

भारत में लंबे समय से यूरिया का अत्यधिक उपयोग एक बड़ी समस्या माना जाता रहा है। सरकार द्वारा यूरिया पर भारी सब्सिडी दिए जाने के कारण इसकी कीमत अन्य उर्वरकों की तुलना में काफी कम रहती है। इसी वजह से कई किसान नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता, पोषक तत्व संतुलन और उत्पादन क्षमता पर असर पड़ता है।

मंत्रालय के अनुसार, किसानों को जागरूक करने के लिए देशभर में लगभग 13 हजार जागरूकता शिविर और संगोष्ठियां आयोजित की गई हैं। इसके अलावा 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रम और करीब 8 हजार खेत प्रदर्शन भी किए गए, जिनमें हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक पोषक स्रोतों के उपयोग की जानकारी दी गई।

अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों और कृषि आदान विक्रेताओं को भी शामिल किया गया है। उर्वरक विक्रेताओं और इनपुट डीलरों के साथ 9,600 से अधिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए ताकि किसानों तक संतुलित उर्वरक उपयोग का संदेश पहुंचाया जा सके।

सरकार ने रेडियो, टीवी और डिजिटल माध्यमों का भी बड़े स्तर पर उपयोग किया है। देशभर में 53 हजार से अधिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर और प्रचार सामग्री लगाई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति संकट और बढ़ती लागत के बीच भारत अब केवल उर्वरकों की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनके संतुलित और दक्ष उपयोग पर भी गंभीरता से काम कर रहा है, ताकि मिट्टी की सेहत और कृषि उत्पादन दोनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।


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