रायपुर: दो कमरों से शुरू किया सूकर पालन, आज 150 सूकरों का फार्म, सालाना 15 लाख रुपए तक की बिक्री
07 अक्टूबर 2026, रायपुर: रायपुर: दो कमरों से शुरू किया सूकर पालन, आज 150 सूकरों का फार्म, सालाना 15 लाख रुपए तक की बिक्री – महज दो कमरों और सूकर पालन की एक यूनिट से शुरू हुआ स्वरोजगार का प्रयास आज सफल व्यवसाय का रूप ले चुका है। सरगुजा जिले के ग्राम शिवनाथपुर निवासी अनिल कुमार खेस्स ने पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना से मिले सहयोग, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के दम पर अपने फार्म का लगातार विस्तार किया। आज उनके फार्म में करीब 150 सूकर हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने लगभग 14.5 से 15 लाख रुपये की बिक्री की, जिससे करीब 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
2018 में एक यूनिट से शुरू किया सूकर पालन
अनिल कुमार खेस्स ने वर्ष 2018 में पशुधन विकास विभाग की सूकर प्रदाय योजना के तहत मिली एक यूनिट से सूकर पालन की शुरुआत की थी। उन्होंने दो कमरों में अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआती वर्षों में कई चुनौतियां आईं, लेकिन उन्होंने व्यवसाय जारी रखा और धीरे-धीरे इसके बेहतर प्रबंधन पर ध्यान दिया। सूकर पालन से होने वाली आय का एक हिस्सा उन्होंने लगातार व्यवसाय में दोबारा निवेश किया। इसी से उनका फार्म धीरे-धीरे बढ़ता गया और आज यहां करीब 150 सूकर हैं।
आय को व्यवसाय में लगाया, बढ़ता गया फार्म
व्यवसाय बढ़ने के साथ अनिल ने सूकरों के बेहतर रखरखाव के लिए फार्म की व्यवस्थाओं का भी विस्तार किया। शुरुआती दो कमरों के बाद उन्होंने 10 अतिरिक्त कमरे तैयार किए। फार्म में प्रजनन के लिए अलग व्यवस्था की गई है। सूकर के बच्चों की वीनिंग के साथ कमजोर बच्चों की विशेष देखभाल भी की जाती है। अनिल के अनुभव के अनुसार, सूकर पालन में केवल पशुओं की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। बेहतर शेड प्रबंधन, संतुलित खान-पान, प्रजनन प्रबंधन, समय पर टीकाकरण और उपचार भी व्यवसाय को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विभागीय मार्गदर्शन से मिली मदद
पशुधन विकास विभाग के चिकित्सकों द्वारा अनिल को समय-समय पर सूकरों के खान-पान, शेड प्रबंधन, प्रजनन, टीकाकरण और उपचार को लेकर मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने विशेषज्ञों की सलाह को अपने फार्म के संचालन में अपनाया और पशुओं की बेहतर देखभाल पर ध्यान दिया। इसका असर उनकी आय में भी दिखाई दिया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में उन्होंने करीब 14.5 से 15 लाख रुपये की बिक्री की, जिसमें लगभग 11 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
सरकारी योजना से मिला स्वरोजगार का अवसर
अनिल कुमार खेस्स की कहानी बताती है कि सरकारी योजना से मिले शुरुआती सहयोग को मेहनत, बेहतर प्रबंधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ाकर पशुपालन को स्वरोजगार का माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने छोटे स्तर पर मिले अवसर को आगे बढ़ाया और व्यवसाय से होने वाली आय को दोबारा निवेश कर फार्म का विस्तार किया। अनिल ने पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से मिले सहयोग और विभागीय चिकित्सकों के मार्गदर्शन ने उन्हें व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण मदद दी। उनकी सफलता ग्रामीण क्षेत्र के अन्य पशुपालकों के लिए भी स्वरोजगार की दिशा में एक उदाहरण है।
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