राज्य कृषि समाचार (State News)

रायपुर: उर्वरक की कालाबाजारी पर साय सरकार सख्त, खरीफ 2026 में 516 मामलों में कार्रवाई

30 अगस्त 2026, रायपुर: रायपुर: उर्वरक की कालाबाजारी पर साय सरकार सख्त, खरीफ 2026 में 516 मामलों में कार्रवाई – किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराने और उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी एवं अनियमित बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कृषि विभाग द्वारा प्रदेशभर में लगातार प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन और कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ परदेशी के प्रशासनिक नेतृत्व में उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ 2026 में अब तक 516 प्रवर्तन कार्रवाई की जा चुकी हैं। वहीं खरीफ 2025 में यह आंकड़ा महज 44 था। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 472 अधिक मामलों में कार्रवाई की गई है। विभाग का कहना है कि प्रवर्तन अभियान का उद्देश्य उर्वरक की उपलब्धता, निर्धारित मूल्य पर बिक्री और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

13 मामलों में FIR, 72 में न्यायालयीन कार्रवाई

खरीफ 2026 के दौरान विभाग ने अनियमितताओं के खिलाफ कई स्तरों पर कार्रवाई की है। अब तक 13 प्रकरणों में FIR दर्ज की गई है, जबकि 72 मामलों में न्यायालयीन कार्रवाई की गई। इसके अलावा 16 उर्वरक विक्रय लाइसेंस निरस्त, 107 लाइसेंस निलंबित और 193 मामलों में विक्रय प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं 115 प्रकरणों में उर्वरक की जप्ती की कार्रवाई की गई है। इसकी तुलना में खरीफ 2025 में FIR का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ था। उस दौरान न्यायालयीन कार्रवाई के 4, लाइसेंस निरस्तीकरण के 2, जप्ती के 2, लाइसेंस निलंबन के 3 और विक्रय प्रतिबंध के 33 मामले सामने आए थे।

मैदानी स्तर पर लगातार निरीक्षण

कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ परदेशी के नेतृत्व में विभागीय अमले ने उर्वरक विक्रय प्रतिष्ठानों के निरीक्षण अभियान को तेज किया है। प्रदेशभर में नियमित और आकस्मिक निरीक्षण कर दुकानों में उर्वरक के भंडारण, स्टॉक, विक्रय अभिलेख, निर्धारित मूल्य, लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

निरीक्षण के दौरान जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों के तहत तत्काल कार्रवाई की जा रही है। विभाग का फोकस यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े।

किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित दर पर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वहीं कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने अधिकारियों को कालाबाजारी, जमाखोरी और नियम विरुद्ध उर्वरक विक्रय करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढिलाई के कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों के तहत कृषि विभाग ने प्रवर्तन गतिविधियों को और मजबूत किया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, निरीक्षण और कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

अनियमितता की जानकारी देने किसानों से अपील

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि उर्वरक खरीदते समय निर्धारित मूल्य और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें। प्रत्येक खरीद पर दुकानदार से बिल या रसीद अवश्य प्राप्त करें। यदि किसी विक्रेता द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि ली जाती है, कालाबाजारी की जाती है, अवैध रूप से उर्वरक का भंडारण किया जाता है या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो इसकी सूचना तत्काल निकटतम कृषि अधिकारी को दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति, विक्रेता या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

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