रायपुर: धमतरी की रानी ओझा बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, बकरी पालन से बढ़ाई आय
04 मई 2026, रायपुर: रायपुर: धमतरी की रानी ओझा बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, बकरी पालन से बढ़ाई आय – बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेजी से एक मजबूत और टिकाऊ आजीविका विकल्प बनता जा रहा है। कम लागत और नियमित आय के कारण यह व्यवसाय विशेष रूप से महिलाओं और छोटे किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण साधन साबित हो रहा है। इसी कड़ी में धमतरी जिले के कातलबोड़ ग्राम पंचायत की निवासी रानी ओझा ने बकरी पालन के जरिए आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है।
रानी ओझा पहले खुले में बकरियों का पालन करती थीं, जहां मौसम की मार, बीमारियों और सुरक्षा जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इससे पशुधन को नुकसान होने के साथ-साथ उनकी आमदनी भी प्रभावित होती थी। लेकिन अब मनरेगा और जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अभिसरण से बने बकरी शेड ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
सरकारी योजनाओं से मिला सहारा
मनरेगा के तहत स्व-सहायता समूहों की आजीविका संवर्धन योजना के अंतर्गत रानी ओझा के लिए बकरी शेड निर्माण को मंजूरी दी गई, जिसके लिए लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये स्वीकृत हुए। वहीं जिला खनिज संस्थान न्यास से लगभग 1 लाख 66 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता मिली। इस संयुक्त सहयोग से सुरक्षित और व्यवस्थित बकरी शेड का निर्माण हुआ, जिसने उनके पशुपालन कार्य को नई दिशा दी।
छोटे स्तर से बड़ी सफलता तक
रानी ओझा ने शुरुआत में केवल 11 बकरियों से बकरी पालन शुरू किया था। सुरक्षित शेड और बेहतर देखभाल के चलते अब उनकी बकरियों की संख्या बढ़कर लगभग 40 हो गई है। बकरियों की बिक्री और उत्पादन से उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी
रानी ओझा ने बताया कि बकरी शेड बनने के बाद पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है और अब वे व्यवस्थित तरीके से इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने काम को लेकर आत्मविश्वास मिला है और वे आगे अपने पशुधन को और बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
ग्रामीण सशक्तिकरण का उदाहरण
स्थानीय सरपंच और जनप्रतिनिधियों ने रानी ओझा की सफलता को ग्रामीण विकास की एक सकारात्मक मिसाल बताया है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर बन रहे हैं।
रानी ओझा की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन, संसाधन और सरकारी सहयोग मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
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